
कोलकाता, 23 जनवरी । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वास्तविक मामलों में फ़ॉर्म-7 आवेदन स्वीकार न करने के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। पार्टी ने ऐसे बूथ स्तरीय अधिकारियों, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की पहचान कर उनकी सूची भारत निर्वाचन आयोग को सौंपने का फैसला किया है।
फ़ॉर्म-7 का उपयोग मृत, दोहराए गए तथा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जाता है।
भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि यह समस्या विशेष गहन पुनरीक्षण के पहले चरण, यानी गणना चरण से ही शुरू हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में बूथ स्तरीय अधिकारियों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दबाव में जानबूझकर फ़ॉर्म-7 आवेदन स्वीकार करने से इनकार किया।
उनके अनुसार, इसी कारण 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में मृत, दोहराए गए और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम बने रहे।
भट्टाचार्य ने कहा कि अब पुनरीक्षण के दूसरे चरण मसौदा मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई में भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में बूथ स्तरीय अधिकारियों के साथ-साथ कुछ निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी भी वास्तविक मामलों में फ़ॉर्म-7 आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम मतदाता सूची में मृत और फर्जी मतदाताओं के नाम बने रहें, ताकि मतदान के दिन उनके नाम पर गलत मतदान कराया जा सके।
भट्टाचार्य ने कहा कि हम ऐसे निर्वाचन अधिकारियों की पहचान कर रहे हैं। कुछ पश्चिम बंगाल सिविल सेवा के अधिकारियों की पहचान भी हो चुकी है। इनमें से कई के पास अभी 15 से 18 साल की सेवा शेष है। हमें उनके पते भी मालूम हैं। निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। तृणमूल का दावा है कि भाजपा की असल मंशा बड़ी संख्या में फ़ॉर्म-7 आवेदन देकर वास्तविक मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवाने की है।
फिलहाल, अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की निर्धारित तिथि 14 फरवरी है। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से संकेत मिले हैं कि यह समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद आयोग द्वारा इस वर्ष प्रस्तावित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की मतदान तिथियों की घोषणा किए जाने की संभावना है।
