
कोलकाता, 23 जनवरी । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)के दौरान मतदाता सूची के मसौदे पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई में अनधिकृत पहचान दस्तावेजाें को मान्य किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने सूक्ष्म पर्यवेक्षकों और विशेष रोल पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया है कि ऐसी प्रत्येक अनियमितता की रोजाना रिपोर्ट सीधे आयोग को भेजी जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी सुनवाई के दौरान कोई सूक्ष्म पर्यवेक्षक किसी दस्तावेज की वैधता को लेकर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्णय से असहमत होता है, तो वह तत्काल लिखित आपत्ति दर्ज करेगा।
यदि आपत्तियों के बावजूद दस्तावेज को स्वीकार किया जाता है, तो मामला विशेष रोल पर्यवेक्षक के संज्ञान में लाया जाएगा। विशेष रोल पर्यवेक्षक संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत करेंगे तथा उनके निर्णयों की समीक्षा भी करेंगे। असहमति की स्थिति में पूरा विवरण मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित माध्यमिक परीक्षा का प्रवेश पत्र अकेले पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा। यह केवल तभी मान्य होगा जब इसे माध्यमिक परीक्षा के उत्तीर्ण प्रमाण पत्र के साथ संयुक्त दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, दावों और आपत्तियों की सुनवाई की समय-सीमा तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल, सुनवाई पूरी करने की अंतिम तिथि 7 फरवरी निर्धारित है, जबकि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
