पुलिसिया अत्याचार के विरोध में आशाकर्मियों का धिक्कार दिवस प्रदर्शन

 

पूर्व मेदिनीपुर, 22 जनवरी । आशाकर्मियों पर हुए कथित पुलिसिया अत्याचार के विरोध में गुरुवार को पूर्व मेदिनीपुर जिले के विभिन्न हिस्सों में धिक्कार दिवस मनाया गया। यह विरोध कार्यक्रम पश्चिम बंगाल आशाकर्मी यूनियन के आह्वान पर आयोजित किया गया।
गौरतलब है कि अत्यधिक कार्यभार थोपे जाने, चार माह का लंबित इंसेंटिव, एक वर्ष का पी.एल.आई. भुगतान न होने, मासिक मानदेय 15 हजार रुपये किए जाने तथा कार्यरत अवस्था में आशाकर्मी की मृत्यु पर पांच लाख रुपये मुआवजे सहित विभिन्न मांगों को लेकर आशाकर्मी 23 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। बुधवार, 21 जनवरी को हड़ताल के 28वें दिन आशाकर्मी स्वास्थ्य भवन की ओर जाने के लिए निकली थीं, लेकिन विभिन्न स्थानों पर पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें रोके जाने, ट्रेनों में चढ़ने से रोकने और कथित रूप से बल प्रयोग किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
यूनियन के अनुसार, खेजुरी-दो ब्लॉक में पुलिस ने आशाकर्मियों की गाड़ी रोककर लाठीचार्ज किया, जिसमें ब्लॉक की संपादिका अतसी दास के पति सुब्रत दास गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके विरोध में खेजुरी थाने के समक्ष आशाकर्मियों ने प्रदर्शन किया। वहीं, पांशकुड़ा और मेचेदा स्टेशनों पर आशाकर्मियों को ट्रेन में चढ़ने से रोककर जीआरपीएफ कार्यालय में कथित रूप से हिरासत में रखा गया। पांशकुड़ा स्टेशन पर आशाकर्मी यमुना माझी का चश्मा तोड़ दिया गया और बैग फाड़ने का आरोप भी लगाया गया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।
यूनियन का आरोप है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में आशाकर्मियों को बिना कारण परेशान किया गया और उन पर मामले दर्ज किए गए, ताकि वे स्वास्थ्य भवन तक न पहुंच सकें। इन घटनाओं के विरोध में गुरुवार को राज्यव्यापी धिक्कार दिवस का आयोजन किया गया।

पूर्व मेदिनीपुर जिले में तामलुक शहर, रामनगर, कांथी और पटाशपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व पश्चिम बंगाल आशाकर्मी यूनियन की जिला संयुक्त संपादिका मानसी दास, जिलाध्यक्ष श्राबंती मंडल, जिला सह-अध्यक्ष झुमा मैती और लक्ष्मी साहू ने किया। वहीं, एआईयूटीयूसी की अखिल भारतीय समिति के सदस्य ज्ञानानंद राय भी प्रदर्शन में उपस्थित रहे।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से आशाकर्मियों की सभी मांगें शीघ्र पूरी करने और पुलिसिया दमन बंद करने की मांग की।

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