गंगासागर आस्था और भक्ति का संगम है — स्वामी विशोकानंद भारती जी महाराज

4 जनवरी से शांतिनगर, लिलुआ में विराट श्री हरिहर हनुमंत महायज्ञ

कोलकाता । निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती जी महाराज, राजगुरु बीकानेर 4 जनवरी से शांतिनगर, लिलुआ में विराट श्री हरिहर हनुमंत महायज्ञ का उद्घाटन कर आशीर्वचन, श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने हेतु सत्संग भवन, कोलकाता में पधारे हैं । स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने सत्संग भवन में अपने आशीर्वचन में कहा जीवन यज्ञमय, भक्तिमय होना चाहिये । भारत में सूर्यवंशी और चंद्रवंशी राजा – महाराजाओं ने यज्ञ कर सुख, संपत्ति, यश- प्रतिष्ठा अर्जित की थी । जीवन में सुख – शांति के उद्देश्य, मंगल भावना से शांतिनगर, लिलुआ में अधिक से अधिक भक्त सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य अर्जित करें । गंगासागर तीर्थयात्रियों को उत्तम स्वास्थ्य की शुभकामना देते हुए कहा गंगासागर आस्था और भक्ति का संगम है । गंगासागर बंगाल का तीर्थ क्षेत्र है । पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज की उपस्थिति में मकर संक्रांति पर गंगासागर में पुण्य स्नान, डुबकी लगाने का सौभाग्य तीर्थयात्रियों को कई वर्षों से मिल रहा है । गौमुख से गंगासागर तक करोड़ों भक्तों और ऋषि – महात्माओं, श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है । राजा भगीरथ अपने पूर्वजों राजा सगर के 60 हजार पुत्रों के मोक्ष के लिए तपस्या कर नदी गंगा को पृथ्वी पर लाए थे, जिसके कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है । शिव ने गंगा की प्रचंड धारा को अपनी जटाओं में रोका और फिर उसे सात धाराओं में पृथ्वी पर प्रवाहित किया । गंगा ने समुद्र तक पहुँच कर भगीरथ के पूर्वजों की राख को छुआ और उन्हें मोक्ष मिला । आज भी किसी कठिन कार्य को पूरा करने के लिए किये गए अथक प्रयास को भगीरथ प्रयास कहा जाता है । सत्संग भवन के ट्रस्टी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, दीपक मिश्रा सहित सत्संग भवन ट्रस्ट मण्डल के सभी ट्रस्टियों ने स्वामी विशोकानंद भारती जी महाराज के सन्यास आश्रम में 50 वर्ष के उपलक्ष में उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन की शुभकामना दी है । स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद, मोहन भारती, राजू शर्मा, अशोक तिवारी, अभय पाण्डेय, सज्जन वर्मा एवम् श्रद्धालु भक्तों ने स्वामी विशोकानंद भारती महाराज का स्वागत किया ।

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