राज्य प्रशासन उदासीन, मतदान केंद्र स्थापित करने के लिए चुनाव आयोग खुद करेगा आवासीय परिसरों की पहचान

कोलकाता, 01 जनवरी। । पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदान केंद्रों को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य प्रशासन की ओर से तय समय पर सूची उपलब्ध न कराए जाने के बाद अब चुनाव आयोग ने यह जिम्मेदारी खुद संभालने का निर्णय लिया है। आयोग अब अपने स्वतंत्र तंत्र के जरिए बहुमंजिला आवासीय परिसरों की पहचान करेगा, जहां मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे आवासीय परिसरों की पहचान करने का निर्देश दिया गया था, जहां कम से कम 300 मतदाता रहते हों। लेकिन लगातार दो बार समय सीमा दिए जाने के बावजूद यह सूची आयोग को नहीं सौंपी जा सकी। 31 दिसंबर अंतिम तारीख थी, इसके बाद भी कई जिलों से जानकारी नहीं पहुंची। इसी के चलते चुनाव आयोग ने प्रशासन पर निर्भर न रहने का फैसला किया है।

सूत्रों ने बताया कि आयोग जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया को लेकर विस्तृत योजना जारी करेगा। आयोग यह भी तय करेगा कि किन परिसरों में मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और वहां व्यवस्थाएं कैसे की जाएंगी।चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी आवासीय परिसर का मालिकाना संगठन या समिति परिसर के भीतर मतदान केंद्र बनाने की अनुमति नहीं देती है, तो आयोग नजदीकी स्थान पर अस्थायी मतदान केंद्र बनाएगा। ऐसे अस्थायी केंद्र इस तरह चुने जाएंगे कि आसपास स्थित एक से अधिक आवासीय परिसरों के मतदाता वहां आसानी से मतदान कर सकें।

आयोग की मौजूदा योजना के अनुसार, आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र मुख्य रूप से कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों के शहरी इलाकों में बनाए जाएंगे। इसके अलावा पश्चिम बर्दवान जिले के औद्योगिक शहर आसनसोल और दुर्गापुर तथा दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में भी ऐसे मतदान केंद्र प्रस्तावित हैं।इसी बीच बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पार्टी की आपत्तियां रखीं। बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र बनाने के फैसले से आयोग पीछे नहीं हटेगा।

चुनाव आयोग के इस रुख के बाद साफ है कि शहरी इलाकों में रहने वाले मतदाताओं को मतदान की सुविधा उनके घरों के और करीब लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि मतदान प्रतिशत बढ़ाया जा सके और चुनाव प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया जा सके।

 

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