
माथुर वैश्य भवन में श्रीमद्भागवत कथा

कोलकाता । माथुरवैश्य भवन में श्रीधाम, वृंदावन से पधारे श्रीभगवान भईयाजी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा में भक्ति भजनों की प्रस्तुति के साथ श्री कृष्ण बाल लीला, रास लीला, कृष्ण – रुक्मणि विवाह से श्रोता भाव विभोर हो गये । मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो… मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई … भक्ति भजनों की प्रस्तुति के साथ कथा वाचक भईया जी ने कहा गोपियों, मीराबाई, राधा का कृष्ण प्रेम श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण को दर्शाता है । प्रेम की पराकाष्ठा – निःस्वार्थ समर्पण, आत्म-त्याग और अपने प्रिय की खुशी को अपनी खुशी से भी ऊपर रखना है, जहाँ केवल प्रेम का भाव रह जाता है, प्रेम स्वयं एक अलौकिक अनुभव बन जाता है । कथा में पधारे धर्मानुरागी, समाजसेवी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी ने कहा श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि है । शुकदेव जी द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाया गया भक्तिमार्ग वैदिक सनातन हिन्दू धर्म में प्रेरक है । राधे – राधे, जय श्रीराधे… भक्तिमय वातावरण में प्रमुख यजमान मिथिलेश गुप्ता, आयोजक माथुरवैश्य इंटरनेशनल क्लब के अध्यक्ष अमित गुप्ता, सचिव प्रवीण गुप्ता, महेन्द्र गुप्ता, सुरेश कौशल, बंगाली बाबू गुप्ता, समाजसेवी विश्वनाथ पारोलिया, हरि प्रकाश, वीरेन्द्र गुप्ता, राजेन्द्र गुप्ता (कपूरवाले), अशोक गुप्ता एवम् महिला समिति तथा कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्त भाव विभोर हो गये ।

