
कोलकाता । करपात्री जी फाउंडेशन के स्वामी त्र्यंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने गोविन्द भवन, कोलकाता में धार्मिक सत्संग में श्रद्धालु भक्तों को जीवन में विद्या, ज्ञान, धन का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हुए कहा धर्मो रक्षति रक्षितः । जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है और नैतिकता और कर्तव्य के पालन के महत्व पर जोर देता है । सामाजिक स्तर पर यह सिद्धांत समाज में परस्पर सद्भावना, न्याय और व्यवस्था बनाए रखता है । स्वामी चैतन्य जी महाराज ने कहा जैसे बीजारोपण से अंकुरित पौधा वटवृक्ष का रूप लेता है, शीतलता, फल प्रदान कर अनुकूल जलवायु में सहयोगी है । गोमाता के दूध एवम् उत्पाद से बच्चों से वृद्ध को पौष्टिक आहार मिलता है उसी तरह जीवन में धर्म का पालन कर मनुष्य अपनी प्रतिभा, विवेक, परोपकार के सेवाकार्यों से सम्मान, प्रतिष्ठा अर्जित करता है । अपनी मातृभाषा, संस्कृति पर गौरवबोध की प्रेरणा देते हुए कहा जो व्यक्ति धर्मनिष्ठ विद्वान, ज्ञानी, शूरवीर – पराक्रमी योद्धा होगा उस श्रद्धालु भक्त पर ईश्वर की कृपा होती है । समाजसेवी केशोराम अग्रवाल, परीक्षित अग्रवाल, गौरांग अग्रवाल, गोरधन निगानिया, महेन्द्र गुप्ता, श्यामसुंदर बंसल, ब्रह्मचारी प्रणवानंद चैतन्य महाराज, आचार्य सागर महाराज, आचार्य आदर्श महाराज, शास्त्री विश्वजीत शर्मा एवम् श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे ।
