परंपरा की लीक और खंडित होती मर्यादा: जानकी नवमी पर मंथन

कोलकाता, 26 अप्रैल: राष्ट्रीय कवि संगम, पश्चिम बंगाल प्रांत की दक्षिण हावड़ा इकाई द्वारा शनिवार को ‘जानकी नवमी महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन डिजिटल माध्यम ‘तरंग’ पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. गिरिधर राय ने की।
पाठ्यक्रम में सीता का नया स्वरूप और वैचारिक विमर्श:
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं बंगाल प्रांत के प्रभारी डॉ. अशोक बत्रा ने शिक्षा और साहित्य के बदलते परिवेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने सीबीएसई (CBSE) के नए पाठ्यक्रम की पुस्तकों का उल्लेख करते हुए उसकी सराहना की। डॉ. बत्रा ने कहा कि नई पुस्तकों में शिव धनुष न टूटने की स्थिति में सीता जी के मन में उठने वाले तर्कों और उनके स्वतंत्र चिंतन को जो स्थान दिया गया है, वह सराहनीय है। यह दर्शाता है कि आधुनिक युग में हम सीता जी को केवल एक मूक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रखर और विचारशील व्यक्तित्व के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए डॉ. गिरिधर राय एवं उनकी पूरी टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
मर्यादा और स्त्री के अस्तित्व पर तीक्ष्ण टिप्पणी:
मुख्य वक्ता, नोएडा से पधारे पूर्व राजभाषा अधिकारी श्री राजेश्वर वशिष्ठ ने कहा, “सभ्य समाज में अक्सर परंपरा की लीक के नाम पर प्रेम और स्त्री के अस्तित्व को गौण कर दिया जाता है। विवाहित स्त्री को पति के अधीन मानकर उसके आत्म-सम्मान की अनदेखी की जाती है, किंतु वर्तमान में सीता की दृढ़ता इन स्थापित पैमानों को चुनौती दे रही है।”
इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. रेशमा पांडा मुखर्जी ने खंडकाव्य ‘परित्यक्ता’ के माध्यम से माँ जानकी के मानसिक द्वंद्व और उनकी अपार सहनशीलता का भावुक चित्रण प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं काव्य अंजलि:
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती हिमाद्रि मिश्र के ‘जानकी मंगलाचरण’ से हुआ। श्रीमती नीलम झा ने अतिथियों का स्वागत किया। ‘माँ जानकी के चरणों में’ काव्य अंजलि अर्पित करने वालों में विजय इस्सर, नीलम मिश्र, बलवंत सिंह, पूनम झा, रमाकांत सिन्हा, उषा जैन, सुषमा राय पटेल, पुष्पा मिश्रा, रंजना झा एवं भास्कर झा प्रमुख थे।
प्रबंधन एवं आभार:
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती रंजना झा ने किया। फेसबुक लाइव का दायित्व प्रांतीय मंत्री एवं मीडिया प्रभारी श्री देवेश मिश्र ने संभाला। अंत में, श्रीमती नीलम मिश्र ने हृदयस्पर्शी धन्यवाद ज्ञापन किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. गिरिधर राय ने माँ सीता को शक्ति और धैर्य का पुंज बताते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

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