Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the wordpress-seo domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/ahscw237zdpo/public_html/wp-includes/functions.php on line 6121
काशीपुर विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव से पहले तनाव की स्थिति - Kolkata Saransh News

काशीपुर विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव से पहले तनाव की स्थिति

पुरुलिया : काशीपुर थाना क्षेत्र के सोनाथली ग्राम पंचायत के कुलतोड़ा इलाके में सोमवार की सुबह लाल स्याही से लिखा एक पोस्टर बरामद हुआ है। इस पोस्टर में लिखा है कि जनता 2026 में शांति प्रिय सोरेन को काशीपुर विधानसभा का तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार देखना चाहती है। उन्हें चुनाव में जीत दिलाई जाएगी। किसी और को उम्मीदवार के रूप में नहीं देखना चाहती। इस पोस्ट के प्रकाशित होने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं कि यह पोस्टर किसने लगाया और किस मकसद से लगाया है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगने शुरू हो गए हैं।
लेकिन कई नेता इस पोस्टर के प्रकाशन के लिए मुँह खोलने से कतरा रहे हैं।
अब देखना है कि राजनीतिक गलियारों में यह पोस्टर कहाँ तक पहुँचता है, कौन या क्या इसे पकड़ता है। इन सब बातों का पता तो समय ही बताएगा। लेकिन इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी की राज्य समिति के सदस्य और आदिवासी नेता अजीत सिंह सद्दार ने कहा, “यह एक बहुत बड़ी बात है।” बीजेपी पर आरोप लगाने से टीएमसी को कोई फ़ायदा नहीं होगा। क्योंकि बीजेपी कभी भी साज़िश में शामिल नहीं होती। इसका एक ज्वलंत उदाहरण 2018 के काशीपुर विधानसभा के पंचायत चुनावों में देखने को मिला, जहाँ टीएमसी ने विभिन्न दलों पर हमला बोला था। 2019 के संसदीय चुनावों में बीजेपी को बढ़त दिलाई थी।
2021 के विधानसभा चुनाव में काशीपुर विधानसभा की जनता ने भाजपा को दोनों हाथों से आशीर्वाद दिया है और भाजपा के विधायक चुने गए हैं। इसलिए यह ज्वलंत ऐतिहासिक प्रमाण है कि भाजपा किसी भी षड्यंत्र में शामिल नहीं है।
इस समय टीएमसी पार्टी गुटबाजी से त्रस्त है। गुटबाजी अपने भीतर ही बहुत ज़ोरों से शुरू हो गई है। यह इसका एक स्पष्ट उदाहरण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *