सावधान रहिए मित्रों! ये वोट के लिए मुफ्त में कुछ भी दे सकते हैं। हो सकता है “एक वोट के लिए एक पान ही खिला दें”…”पान की पीक”

गिरिधर राय (हास्य कवि)

“पान की पीक”

लाइन में खड़ा पहलवान
मुँह में लिये पान
काफी था परेशान
थूकने के लिए
पीछे वाले समाज सेवी ने पूछा
अरे पहलवान क्यों हो परेशान ?
बिगड़ गया पहलान
बोला- पहले खिलाया पान
अब पूछते हो क्यो हो परेशान ?
अरे मेरे मीत !
बोल कहाँ थूकूँ यह पान की पीक ?
तो इसमें क्या है
आगे वाले की जेब में थूक दो.
उछल गया पहलवान क्या तुम बताये हो ?
अगर जान जाएगा
कालर पकड़ कर दो हाथ देगा
और पूछेगा
क्या थूकने के लिये यही जगह पाये हो ?
कैसे जान जाएगा, यह मेरी गारन्टी है
अपने से ही देखो तुम जान पाये हो ??

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