
कांकसा। पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा अंतर्गत विद बिहार अंचल के बासुदेवपुर में साल 1998 में वामपंथी सीपीआईएम समर्पिता बदमाशो ने चार तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या कर दी थी. वासुदेवपुर गांव में आग लगायी गयी, जब पुरे गाँव मे आग लगने मवेशी जल कर मर गए। आग से कई ग्रामीप गंभीर रूप से घायल हो गये. 25 साल पहले हुई उस क्रूर घटना को देखने वाले कई ग्रामीण आज भी जीवित हैं। गांव के लोग आज भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं। 1998 मे तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 12 दिसंबर को कांकसा घटना को शहीद दिवस घोषित किया था. दिन बदल गया राज्य सरकार बदल गयी है. लेकिन आज भी वासुदेवपुर में तृणमूल कार्यकर्ता उसी तरह उस शहीद दिवस को मनाते है. पहले तुणमूत कार्यकर्ता अस्थायी शहीद वैदियों बनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते थे. बर्तमान मे कांकसा के चार शहीदों की प्रतिमा पिछले दो वर्ष पूर्व लगाई गई थी। इस वर्ष भी 12 दिसंबर को शहीद दिवस के अवसर पर कांकसा के वासुदेवपुर में तृणमूल कांग्रेस का सहीद दिवस आयोजित किया गया। इस दौरान राज्य के पंचापत मंत्री और दुर्गापुर पूर्व विधायक प्रदीप मजूमदार, तृणमूल नेता देबांशु भट्टाचार्य, पांडबेश्वर विधायक सह तृणमूल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रबती ने तृणमूल के शहीद शंकर घोष,अमर गोस्वामी,नव गोपाल डोम और लक्ष्मी नारायण घोष की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की।भवानी भट्टाचार्य, दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन विभाग के अध्यक्ष सुभाष मण्डल सहित जिला और ब्लॉक स्तर के नेता शामिल थे।इस मौके पर राज्य के पंचायत मंत्री प्रदीप मजूमदार ने कहा की जिस तरह से सीपीएम की हर्मद वाहिनी ने तृणमूल कांग्रेस के चार युवाओं की नृशंस हत्या कर गांव को जला दिया था. वह मंजर आज भी यहां के लोग नही भूले है. आज राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार इस गांव के लोगों के साथ है।इस दौरान कांकसा के चार शहीदों के परिजनों को मंच पर सम्मानित किया गया।
