
पांडवेश्वर। पांडवेश्वर के दलुरबांध रेलवे लेवल क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद करने के रेलवे के निर्णय के खिलाफ मंगलवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। रेलवे के फैसले के विरोध में एक हजार से अधिक स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया और रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण इलाके में काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के सड़क पर उतरने से पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। रेलवे की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 25 अगस्त 2026 से दलुरबांध रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाना है। रेलवे ने लोगों से आवागमन के लिए नवनिर्मित रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का उपयोग करने की अपील की है। हालांकि, स्थानीय लोग रेलवे के इस निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि दलुरबांध रेलवे फाटक वर्षों से आसपास के गांवों और पांडवेश्वर क्षेत्र के लोगों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रहा है। इसे बंद करने से हजारों लोगों को प्रतिदिन अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि दलुरबांध रेलवे फाटक उनके लिए महज आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा है। फाटक बंद होने से पांडवेश्वर क्षेत्र के लोगों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, फाटक बंद होने के बाद लोगों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में नवनिर्मित आरओबी से होकर लगभग तीन से चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों, दुकानदारों और प्रतिदिन काम के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को होने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजाना अतिरिक्त दूरी तय करने से लोगों का समय और धन दोनों खर्च होगा। विशेष रूप से आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे ने फाटक बंद करने से पहले क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उनकी वास्तविक जरूरतों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा। ग्रामीणों का कहना है कि आरओबी का निर्माण अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन पुराने रेलवे फाटक को पूरी तरह बंद कर देना व्यावहारिक समाधान नहीं है। इसी मांग को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फाटक को बंद करने का निर्णय वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक रेलवे उनकी समस्या का समाधान नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हुए। उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि “दुर्गापूजा तक किसी भी हाल में यह फाटक बंद नहीं होने दूंगा। यह लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।”
विधायक ने लोगों को आश्वासन दिया कि दुर्गापूजा के बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा और क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही आगे का निर्णय लिया जाना चाहिए। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दलुरबांध रेलवे फाटक को बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। लोगों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर रेलवे ट्रैक जाम करने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास कार्यों या नए आरओबी के निर्माण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पुराने फाटक को स्थायी रूप से बंद करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था की व्यवहारिकता और आम लोगों की सुविधा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। मंगलवार के प्रदर्शन के बाद अब इस मुद्दे पर रेलवे प्रशासन के अगले कदम को लेकर क्षेत्र के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। विशेष रूप से दुर्गापूजा से पहले रेलवे और स्थानीय लोगों के बीच इस विवाद का समाधान निकलता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल दलुरबांध रेलवे फाटक को लेकर पांडवेश्वर में लोगों का आक्रोश स्पष्ट रूप से सामने आ चुका है और आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की निगाहें हैं।
