बाराबनी पंचायत समिति में गहराया गतिरोध, स्थायी समिति की बैठक का सभी सदस्यों ने किया बहिष्कार

आसनसोल। बाराबनी पंचायत समिति में उत्पन्न प्रशासनिक एवं राजनीतिक गतिरोध अब और गहरा गया है। पंचायत समिति की स्थायी समिति के गठन तथा विकास एवं प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से बाराबनी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) द्वारा बुलाई गई बैठक में एक भी सदस्य के उपस्थित नहीं होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं तथा विकास कार्यों के प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। ज्ञात हो कि हाल ही में बाराबनी पंचायत समिति के 13 सदस्यों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पंचायत समिति के नियमित कार्यों के संचालन और स्थायी समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बीडीओ कार्यालय की ओर से बैठक बुलाई गई थी। प्रशासन ने दो चरणों में बैठक आयोजित कर शेष 10 सदस्यों को उपस्थित होने का आग्रह किया, किंतु दोनों बैठकों में कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ। परिणामस्वरूप समिति के गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बाराबनी मंडल-2 के भाजपा अध्यक्ष सोना बनर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में पंचायत समिति पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किए बिना जबरन कब्जा किया गया था तथा आम मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद परिस्थितियां बदलने पर पंचायत समिति के 13 सदस्यों ने स्वयं अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके अनुसार, बीडीओ ने समिति का पुनर्गठन कर विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से बैठकें बुलाईं, किंतु जनप्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने से प्रशासनिक कार्य ठप होने की स्थिति बन गई है, जिसका सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ रहा है।
वहीं, बाराबनी के विधायक अरिजीत रॉय ने कहा कि पूर्ववर्ती शासनकाल में गठित पंचायत समिति के प्रतिनिधियों के पास अब जनता का सामना करने का नैतिक साहस नहीं बचा है। यही कारण है कि वे प्रशासन द्वारा बुलाई गई बैठक में भी शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जनता के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लंबे समय तक बाधित नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाए जाएंगे, ताकि पंचायत समिति को शीघ्र सक्रिय कर विकास कार्यों को पुनः गति दी जा सके। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में किसी भी सदस्य की अनुपस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है। अब आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन के स्तर पर तय की जाएगी। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो पंचायत समिति के माध्यम से संचालित विकास योजनाओं, ग्रामीण आधारभूत संरचना, पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा अन्य जनकल्याणकारी कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरे बाराबनी प्रखंड की निगाहें जिला प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन शीघ्र उचित कदम उठाकर पंचायत समिति में व्याप्त गतिरोध समाप्त करेगा, ताकि विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर हों और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ बिना किसी व्यवधान के मिलता रहे।

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