डीवीसी की राख से डिशरगढ़-नियामतपुर-चित्तरंजन मार्ग पर धूल का गुबार, सड़क जाम कर फूटा लोगों का गुस्सा

आसनसोल। दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के ताप विद्युत संयंत्र से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) के परिवहन को लेकर आसनसोल के डिशरगढ़-नियामतपुर-चित्तरंजन मार्ग पर स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राख से लदे ट्रकों से लगातार सड़क पर राख गिर रही है, जिससे पूरा मार्ग धूल और राख की मोटी परत से ढक गया है तथा लोगों का जीवन दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों के साथ भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। सूचना मिलने पर नियामतपुर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समस्या के समाधान के लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता कराने का आश्वासन दिया। पुलिस के आश्वासन के बाद लोगों ने सड़क जाम समाप्त कर यातायात बहाल कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि डीवीसी के ताप विद्युत संयंत्र से प्रतिदिन सैकड़ों राख से लदे ट्रक डिशरगढ़, नियामतपुर होते हुए चित्तरंजन मार्ग से गुजरते हैं। यद्यपि ट्रकों को तिरपाल से ढककर परिवहन किया जाता है, फिर भी वाहनों के निचले हिस्से से लगातार राख सड़क पर गिरती रहती है। इसके कारण डिशरगढ़ से नियामतपुर न्यू रोड होते हुए चित्तरंजन तक का लंबा मार्ग राख और धूल की चादर से ढक जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर जमा राख वाहनों की आवाजाही के दौरान हवा में उड़ने लगती है, जिससे पूरे क्षेत्र में वायु प्रदूषण फैल रहा है। उड़ती धूल के कारण राहगीरों, दोपहिया चालकों, वाहन चालकों, सड़क किनारे रहने वाले लोगों तथा दुकानदारों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि धूल के कारण सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन तथा सड़क पर दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा सड़क किनारे स्थित मकान, दुकानें और पेड़-पौधे भी प्रतिदिन राख की परत से ढक जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पूर्व में भी कई बार विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि केवल ट्रकों को तिरपाल से ढक देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वाहनों से राख सड़क पर बिल्कुल न गिरे। इसके लिए परिवहन व्यवस्था में तकनीकी सुधार, नियमित निगरानी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों और परिवहन एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि गत रविवार को नियामतपुर ट्रैफिक पुलिस ने राख से लदे वाहनों के विरुद्ध विशेष जांच अभियान भी चलाया था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ और राख का परिवहन पहले की तरह जारी है। अब क्षेत्रवासी प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *