
जीवन को संस्कारों से पुष्प – पल्लवित करें — पण्डित विजय शंकर मेहता ।
कोलकाता। अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर व्यास पीठ से पंडित विजय शंकर मेहता ने अपने आशीर्वचन में कहा ध्यान और योग मौन प्रभु की वाणी है । ईश्वर की आराधना, साधना से आत्मीय सुख का अनुभव होता है । श्रीमद् देवी भागवत कथा आनन्द भवसागर में नौका के रूप में आपका मार्ग प्रशस्त करेगी । कथा में श्रोता और कथा वाचक की प्रसन्नता, आनन्द पूर्णाहुति है । जीवन को संस्कारों से पुष्प – पल्लवित करने की प्रेरणा देते हुए कहा सांसारिक जीवन में घर की सजावट करते हैं, उसी तरह जीवन को संस्कारों से पुष्प – पल्लवित करते हुए रिश्तों से सजा कर, बगिया को महका कर जीवन सार्थक करें । समझदार पत्नी का संतुष्ट होना पतिव्रता नारी की पहचान है । गृहस्थ जीवन में पति का अर्द्धनारीश्वर शरीर है । पत्नी के असंतुष्ट, दुःखी होने से पति के स्वभाव में बेचैनी, चिड़चिड़ापन झलकता है ।

पण्डित मेहता ने वर्तमान समय में महंगाई, असुरक्षा एवं अनेक समस्याओं पर कहा संस्कारों पर आधारित जीवन जीने से समाज एवं परिवार में खुशी तथा राष्ट्र का विकास होगा । जरा मुस्कुराइये एवं जीवन को रिश्तों से सजाना सीख लो…भक्ति भजन के गायन, सामूहिक आरती, हवन – यज्ञ में शामिल श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ को सुशोभित कर रहे पण्डित मेहता एवं संगीतमय कथा में उनके सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया । समाजसेवी के के सिंघानिया, अनिल झुनझुनवाला, गोपी धुवालिया, संजय अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, हरीश काबरा, रवि शंकर अग्रवाल, सुभाष बालासरिया, सुशील खेतान, आर एस बंसल, प्रदीप भाटिया, सुशील अग्रवाल, संजय टाइंवाला, सुशील झुनझुनवाला, अनूप चौधरी एवं श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया ।
