
कोलकाता, 5 जून।श्री बिहारीजी मंदिर की ओर से अधिक यानी पुरुषोत्तम मास के मौके पर पाथुरियाघाट स्ट्रीट स्थित मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ की कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को व्यासपीठ पर आसीन आचार्य घनश्यामजी व्यास ने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्रभु की असीम कृपा से हमें यह मानव तन मिला है, जिसका सदुपयोग सत्कर्म और परोपकार में करना चाहिए। व्यासपीठ से आचार्यजी ने कहा कि संसार के सारे रिश्ते-नाते झूठे हैं और केवल एक परमात्मा का नाम सत्य है, जो हमारे साथ रहता है। उन्होंने कहा कि स्त्री के लिए पतिव्रता होना ही सबसे बड़ा धर्म है। पति ही पत्नी के लिए परमेश्वर है। कथा प्रारंभ से पूर्व दूसरे दिन के यजमान राजकुमार-गंगा सुल्तानिया ने विधिवत पूजा संपन्न कराई।
