भव पार होने की वैतरणी है भागवत कथा : घनश्यामजी व्यास


कोलकाता, 4 जून। भागवत कथा भव पार होने की वैतरणी है। भागवत कथा का श्रवण पतित पावन मां गंगा यानी कोलकाता शहर में श्रावण मास के साथ-साथ पुरुषोत्तम मास में किया जाए तो अति उत्तम होता है। यह कहना है घनश्यामजी व्यास का। अधिक यानी पुरुषोत्तम मास के मौके पर श्री बिहारीजी मंदिर की ओर से पाथुरियाघाट स्ट्रीट स्थित मंदिर प्रांगण में घनश्यामजी ने व्यासपीठ से उक्त बातें कही। वृहस्पतिवार की सुबह कथा शुभारम्भ से पूर्व निकाली गई मंगल कलश यात्रा में बिरमप्रकाश-नीलू सुल्तानिया, विनोद-बेला सुल्तानिया, सुरेश-सरला अग्रवाल, बिनोद-अलका जालान, विनोद-अन्नू जालान, शंकर-अंजू जालान, पवन गुप्ता, सुशील मुरारका व श्याम बिहारी सुल्तानिया समेत कई भक्तों ने शिरकत की। कथा प्रारंभ से पूर्व पहले दिन के यजमान बिरमप्रकाश-नीलू सुल्तानिया ने विधिवत पूजा संपन्न कराई।

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