
रानीगंज। सिख धर्म के पाँचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज के शहीदी दिवस के अवसर पर रानीगंज गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा स्कूल मोड़ क्षेत्र में विशाल लंगर एवं छबील सेवा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में राहगीरों, स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं को ठंडा मीठा शरबत तथा लंगर प्रसाद वितरित किया गया। भीषण गर्मी और तेज धूप को देखते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से विशेष रूप से ठंडे मीठे शरबत की छबील लगाई गई, जिससे हजारों लोगों को राहत मिली। इसके साथ ही रोटी और सब्जी का लंगर भी परोसा गया। सुबह से लेकर देर शाम तक सेवा कार्य निरंतर जारी रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव सरदार रविंद्र सिंह ने कहा कि यह आयोजन श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज की पावन शहादत को समर्पित है। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने मानवता, सेवा, त्याग, सहिष्णुता, नम्रता और समानता का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। गुरु जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, जिसे सिख समुदाय सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करता है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार हरजीत सिंह बग्गा ने बताया कि गुरु अर्जन देव जी को जेठ माह की भीषण गर्मी में लाहौर में गर्म तवे पर बैठाकर अमानवीय यातनाएं दी गई थीं, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और धर्म से कभी समझौता नहीं किया। उनकी शहादत साहस, धैर्य और मानवता के प्रति समर्पण की अद्वितीय मिसाल है। इसी स्मृति में प्रत्येक वर्ष छबील और लंगर सेवा का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों तक सेवा और मानवता का संदेश पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रानीगंज थाना के इंस्पेक्टर सुबीर कर्मकार ने भी सेवा कार्य में भाग लिया और स्वयं राहगीरों को शरबत वितरित किया। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं मानवीय कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की सेवा भावना समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा और मानवता को मजबूत करती है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सेवा कार्य में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों, युवाओं एवं महिला सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ तथा लोगों ने गुरु अर्जन देव जी महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
