आसनसोल उत्तर में झंडा लगाने को लेकर बवाल, तृणमूल–भाजपा समर्थकों में तीखी झड़प, पुलिस ने संभाला मोर्चा

आसनसोल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनावी सरगर्मियों के बीच रविवार को एक नया विवाद सामने आया, जिसने इलाके के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला राजनीतिक झंडा लगाने को लेकर शुरू हुआ, जो देखते ही देखते दो प्रमुख दलों के समर्थकों के बीच तीखी झड़प में बदल गया। घटना आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 48 और 49 के सीमावर्ती क्षेत्र की है, जहां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच झंडा लगाने को लेकर पहले बहस हुई। कुछ ही देर में यह विवाद बढ़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मौके पर जमकर नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस का दौर चला, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया। घटना के बाद दोनों दलों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। तृणमूल कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि भाजपा समर्थकों ने जानबूझकर चुनावी माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से उकसावे की राजनीति की और स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया और कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता क्षेत्र में जबरन अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं तथा अन्य दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस की सक्रियता के कारण संभावित बड़ी घटना टल गई। दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया गया तथा इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सतर्कता बरत रही है। राजनीतिक जानकारो का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही इस प्रकार की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है, जिससे प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ेगी। आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, ऐसे में यहां की छोटी-छोटी घटनाएं भी बड़े सियासी संकेत देती हैं। इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का चुनावी मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। अब क्षेत्र की जनता की नजर प्रशासन की निष्पक्षता और राजनीतिक दलों के आचरण पर टिकी हुई है।

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