जामुड़िया के न्यू केंदा ओसीपी कुआरी-तीन में ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुनर्वास और पानी की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीणों ने बंद कराया काम

जामुड़िया। जामुड़िया क्षेत्र के ईसीएल केंदा एरिया अंतर्गत न्यू केंदा ओसीपी कुआरी-तीन में गुरुवार को स्थानीय खेपाडांगा आदिवासी गांव के लोगों ने पुनर्वास सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और खदान का कामकाज बंद करा दिया। ग्रामीणों के विरोध के कारण सुबह से ही ओसीपी में कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप रहा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी महिला और पुरुष ओसीपी परिसर में पहुंच गए और वहां चल रही सभी मशीनों को बंद करा दिया। साथ ही कोयला ढुलाई में लगी ट्रांसपोर्टिंग गाड़ियों को भी रोक दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक खदान में काम नहीं होने दिया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही ईसीएल केंदा एरिया की सुरक्षा टीम तथा सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंच गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाल लिया। हालांकि ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस संबंध में केंदा खेपाडांगा आदिवासी पाड़ा के निवासी कृष्ण मुर्मू ने बताया कि गांव के बिल्कुल समीप ओसीपी का संचालन होने के कारण खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार ब्लास्टिंग होने से कई घरों की छत और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। ब्लास्टिंग के समय ऐसा महसूस होता है मानो इलाके में भूकंप आ गया हो, जिससे खासकर महिलाओं और छोटे बच्चों में दहशत फैल जाती है। उन्होंने कहा कि ईसीएल द्वारा कोयला उत्पादन करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए सबसे पहले प्रभावित ग्रामीणों का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गर्मी की शुरुआत होते ही गांव के तालाब और कुएं लगभग सूख चुके हैं। आने वाले दिनों में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका है, लेकिन ईसीएल प्रबंधन की ओर से अब तक पानी की व्यवस्था के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं गांव की महिलाओं रीता बाउरी, अंजलि मड़ी और कल्पना मुर्मू ने भी कहा कि खदान में होने वाली लगातार ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले पूरे आदिवासी पाड़ा का पुनर्वास किया जाए। महिलाओं ने बताया कि गांव में पानी की भारी किल्लत है और एकमात्र सहारा तालाब भी सूखने के कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ईसीएल प्रबंधन उन्हें सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित कर देता है और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करता है, तो इसके बाद कंपनी जितना चाहे कोयला उत्खनन कर सकती है। ग्रामीणों के इस प्रदर्शन के कारण गुरुवार सुबह से न्यू केंदा ओसीपी कुआरी-3 में खनन और परिवहन का कार्य पूरी तरह बंद पड़ा रहा। अब सभी की नजर ईसीएल प्रबंधन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *