
राजस्थान परिषद ने वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यकार दाऊलाल जी कोठारी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है ।
परिषद के महामंत्री अरुण प्रकाश मल्लावत ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धेय कोठारी जी हिन्दी- बांग्ला के सेतु थे। उन्होंने रविन्द्र संगीत को हिन्दी में रूपान्तरित करने और उसे सुप्रतिष्ठित करने का महनीय कार्य किया था। उनके सत्प्रयासों से बहुत से गैर बांग्ला भाषी संगीत प्रेमी रविन्द्र संगीत से जुड़ सके। संगीत के विद्यार्थी और गायक कविगुरु रबिन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीतों की भावभूमि को अधिक गहरायी से समझ पाये। उनके जाने से एक मायने में रविन्द्र संगीत की भी क्षति हुई है। परिषद के पदाधिकारियों ने कोठारी जी के अविस्मरणीय अवदानो को याद किया एवं बताया कि वे राजस्थान परिषद के साथ आत्मीयता से जुड़े हुए थे। आप परिषद के सभी आयोजनों में बढ चढ कर हिस्सा लेते थे। तत्पश्चात परम पिता परमेश्वर से दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान देने एवं उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने के लिये प्रार्थना की गयी।
