नवीन शिव शक्ति मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा: गाजे-बाजे के साथ शिवलिंग-हनुमान जी की प्रतिमा का नगर भ्रमण. भक्तों ने लगाई रंग अबीर गुलाल के साथ खेली होली

बराकर : बराकर नदी तट पर नवनिर्मित शिव शक्ति मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव ने भक्तों के दिलों में भगवान शिव और हनुमान जी की भक्ति की लहर पैदा कर दी। दूसरे दिन की भव्य पूजा-अर्चना के बाद बुधवार को तीसरे दिन का आयोजन अनोखे उत्साह के साथ संपन्न हुआ, जहां गूंजते मंत्रों, झांझ-मंजीरों की धुन और सैकड़ों भक्तों की उपस्थिति ने पूरे इलाके को दिव्य आभा से नहला दिया।दूसरे दिन पुजारी ब्रह्मदेव पांडे ने मुख्य यजमान दिनेश प्रसाद, चंद्र शेखर साव उनकी धर्म पत्नियों को वैदिक विधि-विधान से 18 कलशों के पवित्र जल से शिवलिंग और हनुमान जी की प्रतिमा का स्नान कराया। मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमाओं के नेत्रावरण के बाद भगवान जी को विश्राम कराया गया, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक समापन का क्षण साबित हुआ। तीसरे दिन सुबह विधिवत पूजन के बाद भगवान शिवलिंग और हनुमान जी की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण यात्रा पर निकाला गया। यात्रा में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए, जो नाचते-गाते भगवान के दर्शन कर रहे थे। यात्रा का पहला पड़ाव बराकर स्टेशन स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर रहा, जहां भव्य आरती उतारी गई। इसके बाद हलवाई पट्टी के रक्षा काली मंदिर में पूजा-अर्चना हुई। चरम उत्साह तब छाया जब बराकर गायत्री मंदिर पहुंचकर रंग-गुलाल की होली खेली गई। भक्तों ने एक-दूसरे पर अबीर-अक्षत उड़ाते हुए भगवान का जयकारा लगाया, मानो स्वयं शिव-हनुमान का आगमन हो। उसके बाद पुरानी प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन कर नई प्रतिमाओं को बराकर नदी तट पर स्थित नवीन शिव शक्ति मंदिर में स्थापित किया गया। नदी की लहरों के बीच यह दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा।पूरे आयोजन में समिति के अध्यक्ष सुरेश विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष जमुना गुप्ता, सचिव अमरजीत गुप्ता, कोषाध्यक्ष महेश तिवारी, सहित श्री राम सिंग, मोती यादव, जितेश सिंग सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समिति सचिव अमरजीत गुप्ता ने बताया, “शाम को मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया, उसके पश्चात प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। यह महोत्सव स्थानीय भक्तों के लिए वर्षों तक स्मरणीय रहेगा। “इस प्राण प्रतिष्ठा ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि बराकर क्षेत्र में सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बन गया। भक्तों का मानना है कि अब यह मंदिर क्षेत्र की सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला केंद्र बनेगा।

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