एसआईआर को लेकर चिंता: पश्चिम बर्धमान में कई आदिवासियों के नाम मतदाता सूची से हटे, चुनाव आयोग को सौंपा गया ज्ञापन

आसनसोल। पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर (विशेष पुनरीक्षण अभियान) को लेकर आसनसोल–दुर्गापुर क्षेत्र की ऑल आदिवासी को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने गहरी चिंता जताई है। संगठन के प्रतिनिधियों ने पश्चिम बर्धमान के जिलाधिकारी के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि जिले के अनेक गरीब, निरक्षर और जागरूकता से वंचित आदिवासी/जनजातीय लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। संगठन ने इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

संगठन का कहना है कि विशेष रूप से पश्चिम बर्दवान जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब पाए गए हैं। उनका आरोप है कि गरीबी, अशिक्षा, सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी का अभाव और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जबकि इनमें से कई परिवार पीढ़ियों से उसी क्षेत्र में निवास करते आ रहे हैं।

कुछ दिन पहले पत्रकारों से बातचीत में पश्चिम बर्धमान आदिवासी स्टूडेंट एंड यूथ फोरम के अध्यक्ष हीरालाल सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि जिले में एक भी आदिवासी समुदाय के व्यक्ति का नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सूची से बाहर किया गया, तो संगठन व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा।

ऑल आदिवासी को-ऑर्डिनेशन कमिटी के अध्यक्ष जनार्दन कड़ा ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े इस वर्ग के अनेक लोग मताधिकार और चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। ऐसे में उनका नाम मतदाता सूची से हट जाना उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग से वंचित कर देता है। इससे उन्हें प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संगठन ने ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि जिन मामलों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी या त्रुटि है, वहां पारंपरिक आदिवासी/जनजातीय ग्राम परिषद के प्रमाणन को मान्यता दी जानी चाहिए। संगठन के अनुसार, ग्राम परिषद स्थानीय स्तर पर वास्तविक निवासियों की पहचान और निवास की पुष्टि करने में सक्षम है। यदि इस प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाती है, तो वास्तविक मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर होने से बचाया जा सकता है।

संगठन के सचिव मोतिलाल सोरेन ने मांग की कि गरीब आदिवासी और जनजातीय लोगों के नामों की पुनः समीक्षा कर उन्हें शीघ्र मतदाता सूची में शामिल किया जाए, ताकि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर सकें।

जानकारी के अनुसार, इस ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा राज्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई है। इस अवसर पर संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित

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