कोलकाता, 13 फरवरी । पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची पर आपत्ति जताई है। आयोग ने पाया है कि सूची में शामिल लगभग 500 अधिकारी पहले से ही सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के रूप में कार्यरत हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक विश्वस्त सूत्र के अनुसार, राज्य सरकार से 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों के नाम इसलिए मांगे गए थे ताकि उन्हें मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया में माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जा सके। हालांकि, सूची में शामिल 500 अधिकारी पहले से एईआरओ के रूप में काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त करने का कोई तर्क नहीं बनता। सूत्र ने बताया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ)/एईआरओ की जिम्मेदारियां और कार्य-प्रकृति अलग-अलग होती हैं।
सीईओ कार्यालय के सूत्र ने यह भी बताया कि एसआईआर से संबंधित सुनवाई सत्रों की समय-सीमा शनिवार को समाप्त हो रही है, लेकिन आयोग को अब तक इन 8,505 अधिकारियों का विस्तृत पृष्ठभूमि विवरण, जैसे कि वर्तमान वेतनमान और संबंधित विभागीय जानकारी, राज्य सरकार या संबंधित विभागों से प्राप्त नहीं हुआ है।
आयोग ने इन अधिकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी इसलिए मांगी थी क्योंकि सीईओ कार्यालय को यह सूचना मिली थी कि सूची में शामिल सभी 8,505 अधिकारी ग्रुप-बी श्रेणी के हैं। सूत्रों के अनुसार, सूची में एक सेवानिवृत्त राज्य सरकारी अधिकारी का नाम भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में केवल उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं।
अधिकारी ने कहा, “यह सत्तारूढ़ दल द्वारा पर्दे के पीछे से प्रभाव डालकर चुनाव में गड़बड़ी करने की साजिश प्रतीत होती है। जब पारदर्शिता नहीं है और कथित रूप से करीबी लोगों को तैनात किया जा रहा है, तो प्रक्रिया पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? मैंने निर्वाचन आयोग से मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।”
