मतदाता सूची पर सुनवाई के लिए तृणमूल के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम को नोटिस

कोलकाता, 15 जनवरी । भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल की प्रारूप मतदाता सूची में दावे और आपत्तियों को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम को सुनवाई का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस गुरुवार को जारी किया गया।

सूत्रों के अनुसार, समीरुल इस्लाम को यह नोटिस “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” (तार्किक विसंगति) के मामले में भेजा गया है। वर्तमान मतदाता सूची में उनके नाम और उनके पिता के नाम में वर्ष 2002 की मतदाता सूची से तुलना करने पर असंगतियां पाई गई हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 में ही पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का पिछला संशोधन हुआ था।

समीरुल इस्लाम को 19 जनवरी को सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया है। वह पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के हंसन विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। समीरुल इस्लाम ने सुनवाई के नोटिस की प्राप्ति की पुष्टि भी की है।

गौरतलब है कि समीरुल इस्लाम ऐसे दूसरे तृणमूल कांग्रेस सांसद हैं, जिन्हें इस प्रकार का नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले पश्चिम मेदिनीपुर जिले की घाटाल लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के तीन बार के सांसद और अभिनेता से राजनेता बने दीपक अधिकारी उर्फ देव को भी इसी तरह का नोटिस भेजा गया था। देव हाल ही में सुनवाई में शामिल हुए थे और बाहर निकलने के बाद उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की थी कि मतदाताओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को नोटिस जारी करने के मामले में अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक रुख अपनाया जाए।

इस बीच, गुरुवार को निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय को सूचित किया कि पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) द्वारा आयोजित माध्यमिक परीक्षा के एडमिट कार्ड को सुनवाई के लिए बुलाए गए मतदाताओं के लिए वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे मामला “अनमैप्ड” हो या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” का।

सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जहां माध्यमिक उत्तीर्ण प्रमाणपत्र निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 13 पहचान दस्तावेजों में शामिल है, वहीं माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड उसी श्रेणी में नहीं आता। हाल ही में सीईओ कार्यालय ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय को सुझाव भेजा था कि क्या माध्यमिक एडमिट कार्ड को वैध पहचान पत्र माना जा सकता है, लेकिन गुरुवार को आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि एडमिट कार्ड को पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य अंतिम चरण में है और इसी क्रम में दावे एवं आपत्तियों की सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *