
रानीगंज। दुर्गापूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को सहेजने का भी अवसर है। त्योहार की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचें, इसी भावना के साथ रानीगंज ट्रैफिक गार्ड ने महासप्तमी के अवसर पर एक सराहनीय पहल की। वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को मां दुर्गा के दर्शन कराने के लिए शहर के प्रमुख पूजा पंडालों में ले जाया गया। इस दौरान करीब 10 बुजुर्गों ने पूजा की रौनक, आकर्षक प्रतिमाओं और उत्सवी माहौल का आनंद उठाया। पुलिसकर्मियों की इस पहल से बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी झलक उठी। दुर्गापूजा के दौरान रानीगंज शहर रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट और भव्य पूजा पंडालों से जगमगा रहा है। सड़कों पर लोगों की भीड़ और पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच रानीगंज ट्रैफिक गार्ड ने उन बुजुर्गों की खुशियों का ख्याल रखा, जो उम्र और परिस्थितियों के कारण अक्सर ऐसे आयोजनों से दूर रह जाते हैं। ट्रैफिक गार्ड की ओर से वृद्धाश्रम में रहने वाले करीब 10 बुजुर्गों को मां दुर्गा के दर्शन कराने की व्यवस्था की गई। पुलिसकर्मी उन्हें वृद्धाश्रम से अपने साथ लेकर निकले और शहर के प्रमुख पूजा पंडालों तक पहुंचाया। वहां बुजुर्गों ने मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा दुर्गोत्सव की चहल-पहल का आनंद लिया। बुजुर्गों की सुविधा का ध्यान रखते हुए उनके लिए टिफिन और जलपान की भी व्यवस्था की गई। पूजा पंडालों में दर्शन कराने के बाद सभी बुजुर्गों को सुरक्षित वृद्धाश्रम वापस पहुंचाया गया। पूरी पहल के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके आराम और सुविधा का ध्यान रखा, ताकि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस आयोजन का सबसे भावुक पक्ष बुजुर्गों की खुशी और उनके चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि रही। मां दुर्गा के दर्शन और पूजा पंडालों की रौनक के बीच उन्हें त्योहार का हिस्सा बनने का अवसर मिला। बुजुर्गों ने इस पहल के लिए रानीगंज ट्रैफिक गार्ड के प्रति आभार जताया और पुलिसकर्मियों को आशीर्वाद दिया। आमतौर पर यातायात पुलिस की जिम्मेदारी सड़कों पर व्यवस्था बनाए रखने, जाम नियंत्रित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के साथ लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की होती है। लेकिन रानीगंज ट्रैफिक गार्ड की इस पहल ने पुलिस की सामाजिक भूमिका का एक दूसरा पक्ष भी सामने रखा। इससे स्पष्ट हुआ कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। महासप्तमी के अवसर पर बुजुर्गों को पूजा पंडालों तक पहुंचाकर मां दुर्गा के दर्शन कराना भले ही एक छोटी पहल हो, लेकिन इसका सामाजिक संदेश व्यापक है। उम्र के इस पड़ाव पर अपनों के साथ और सामाजिक सहभागिता की जरूरत और भी बढ़ जाती है। ऐसे में त्योहार के अवसर पर बुजुर्गों को खुशी के कुछ पल देना उनके प्रति सम्मान और अपनत्व जताने का सार्थक प्रयास है। रानीगंज ट्रैफिक गार्ड की इस पहल ने यह संदेश दिया कि दुर्गापूजा की वास्तविक सार्थकता केवल भव्य सजावट, रोशनी और आकर्षक पंडालों में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने में भी है। जब त्योहार की उमंग उन लोगों तक पहुंचती है, जो अक्सर समाज की भागदौड़ में पीछे छूट जाते हैं, तभी उत्सव का आनंद सही मायने में व्यापक होता है।
