राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर कोलकाता में भव्य ‘कलाकलन कोलकाता’ कार्यक्रम सम्पन्न


कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद् और सरस भारत-जमशेदपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की सार्द्धशतवर्षपूर्ति (150वीं वर्षगांठ) के उपलक्ष्य में भारतीय भाषा परिषद् के केन्द्रीय सभागार में ‘कलाकलन कोलकाता’ नामक छह घंटे का विशिष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संगीत, सम्मान, प्रबोधन, काव्यपाठ और पुस्तक लोकार्पण सहित बहुआयामी प्रस्तुतियाँ हुईं।


कार्यक्रम का स्वरूप और भाषाई विविधता
कार्यक्रम की शुरुआत ‘वन्दे मातरम्’ के जीवन्त समूह गान और ‘आदीश्वर’ शीर्षक गीत से हुई। इस आयोजन में संस्कृत, बंगाली, मैथिली, असमी, भोजपुरी, अवधी, खड़ी बोली, मगही और गुजराती सहित न्यूनतम सात भारतीय भाषाओं में कलात्मक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जो भाषाई एकता और सांस्कृतिक समन्वय का संदेश लेकर आईं।


बंगाल, बंकिम और वन्दे मातरम्’
प्रथम सत्र ‘प्रबोधन (बंगाल, बंकिम और वन्दे मातरम्)’ में सरस भारत की महासचिव सुश्री सोनी सुगन्धा और कलाकलन कोलकाता के स्थानीय संयोजक डॉ. गिरिधर राय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि विषय प्रवर्तन श्री आशीष झुनझुनवाला ने किया। प्रधान वक्ता पूर्व आचार्य डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि “विशिष्ट पल ही शब्द को मन्त्र में बदलते हैं”, जबकि मुख्य अतिथि ब्रजेश कुमार त्रिपाठी (चीफ़ विजिलेंस ऑफ़ीसर, कोल इण्डिया लिमिटेड-कोलकाता) ने कहा कि जिस प्रकार ‘वन्दे मातरम्’ ने भारत की मुक्ति की नींव मज़बूत की, अब वही चेतना भविष्य के समुन्नत शिखर की कलश स्थापना करेगी। भारतीय भाषा परिषद् के निदेशक डॉ. शम्भुनाथ के वक्तव्य ने सत्र का भरत-वाक्य लिखा; इस अवसर पर विदुषी विमला पोद्दार और घनश्याम सुगला भी मंच पर उपस्थित रहीं।


सांगीतिक और काव्य प्रस्तुतियाँ
सांगीतिक टीम में ठाकुर सुशील साहिल (पटना), बुलबुल (महागामा गोड्डा), डॉ. राखी सिंह कटियार (बड़ौदा), आशीष कुमार मिश्र (जदिया सुपौल) और कुमार उत्तम (महागामा गोड्डा) ने गायक के रूप में भूमिका निभाई, जबकि पुलिस इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिंह (टाटानगर, तबला), बसन्त (ऑक्टोपैड), चन्द्रकान्त गुप्ता (की-बोर्ड), सोनू कुमार (ढोलक, देवघर) और राजेश पासवान (साउण्ड इंजीनियर, महागामा) ने वादक के रूप में सराहनीय योगदान दिया।
काव्यपाठ सत्र में सीए डॉ. शैलेन्द्र सिंह मृदुल, डॉ. सर्वेश त्रिपाठी (लखनऊ), डॉ. अभिषेक तिवारी (शिमला), डॉ. नयना डेलीवाला (गुजराती), अशोक कुमार सिंह अजय (मगही), व्यंग्यकार किशनजी खण्डेलवाल (भुवनेश्वर), राजीव कुमार सिंह, देवेश मिश्रा (ओज), बालकृष्ण मिश्र (यूसीआई, नरवा पहाड़), सूरज सिंह राजपूत (चाईबासा), नीतीश कुमार सिंह (बिहार शरीफ), कामेश्वर कुमार सिंह (राँची), सुमन राय (जामताड़ा), अशोक कुमार अजय, शम्स परवाना और उर्वशी श्रीवास्तव आदि ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह
कार्यक्रम में पाँच पुस्तकों का लोकार्पण हुआ: ‘आपके आसपास’ (डॉ. सर्वेश त्रिपाठी), ‘आसमान का आँगन’ (भवानी प्रसाद मिश्र साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, सोनी सुगन्धा), ‘यहाँ सब लोग हँसते-बोलते हैं’ (भवानी प्रसाद मिश्र साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, सुशील साहिल), ‘हृदय पुष्प’ (मीतू कानोडिया) और ‘पद्म पराग’ (श्रद्धा टिबड़ेवाल)।


सम्मान समारोह में कोलकाता के सुप्रसिद्ध गांधीवादी समाजकर्मी शंकर सान्याल को ‘जनश्री सम्मान’ और कल्याणकारी कार्यों के लिए कोलकाता की संस्था ‘परिवार मिलन’ को ‘राष्ट्रनिर्माता सम्मान’ से नवाज़ा गया; संकल्प सृष्टि के श्री अविनाश गुप्ता और समाजसेवी श्री भगीरथ सारस्वत को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्रीमती दुर्गा व्यास, निखिल दुबे, नीलम दुबे, अमित मूँदड़ा, अशोक शर्मा, मोहन तिवारी, कृष्णकुमार दुबे, डॉ. आरएस मिश्र, उर्वशी श्रीवास्तव, अभिनेता अशोक सिंह, योगेश अवस्थी और लक्ष्मी कुमार शर्मा आदि की उपस्थिति बनी रही।
संचालन और धन्यवाद
कार्यक्रम का आद्योपांत संचालन प्रखर वक्ता एवं सुप्रसिद्ध कवि प्रो. (डॉ.) राहुल अवस्थी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गिरिधर राय ने किया।


2026 में ‘वन्दे मातरम्’ का राष्ट्रीय महत्व
2026 को ‘वन्दे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के रूप में देशभर में मनाया जा रहा है; केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 से नवंबर 2026 तक वर्षभर की स्मृति कार्यक्रमों की घोषणा की है और 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार पूरे छह छंदों वाला संस्करण गाया गया। इसी संदर्भ में अगले वर्ष की 50वीं अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला का केंद्रीय विषय भी ‘वन्दे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ रखा गया है।

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