
जामुड़िया। पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के केंदा निवासी हरेराम पासवान का परिवार इन दिनों अपनी 18 वर्षीय बेटी लक्ष्मी पासवान की जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहा है। पिछले तीन वर्षों से दोनों किडनी खराब होने के कारण लक्ष्मी नियमित डायलिसिस पर निर्भर है। परिवार ने इलाज के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च कर दी है, लेकिन अब किडनी प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक राशि जुटाना उनके लिए असंभव होता जा रहा है।
परिजनों के अनुसार, हरेराम पासवान पहले चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक संकट के कारण दुकान का किराया समय पर नहीं चुका पाने से उनका रोजगार भी छिन गया। बेटी के इलाज के लिए उन्होंने अपनी जमीन-जायदाद तक बेच दी, फिर भी इलाज का खर्च लगातार बढ़ता गया और परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया।
लक्ष्मी के उपचार के लिए परिजन उसे कोलकाता, वेल्लोर और दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पतालों में ले गए। आर्थिक सहायता के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडानी सहित कई जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवी संस्थाओं से भी मदद की गुहार लगाई। परिवार को प्रधानमंत्री राहत कोष से तीन लाख रुपये की सहायता प्राप्त हुई है, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों और समाजसेवियों ने भी समय-समय पर सहयोग किया है।
चिकित्सकों की सलाह पर अब लक्ष्मी की मां डेजी पासवान ने अपनी एक किडनी दान करने का निर्णय लिया है। दिल्ली के अस्पताल में दोनों की आवश्यक चिकित्सीय जांच पूरी हो चुकी है और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया के लिए उन्हें उपयुक्त पाया गया है। हालांकि, ऑपरेशन और उपचार पर लगभग 8.50 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। सरकारी सहायता मिलने के बावजूद अभी भी बड़ी धनराशि की कमी बनी हुई है। इसके अलावा दिल्ली में रहने, आने-जाने और दवाइयों का खर्च भी परिवार के लिए भारी पड़ रहा है।
डेजी पासवान ने भावुक स्वर में कहा कि एक मां के लिए अपनी संतान से बढ़कर कुछ नहीं होता। वह अपनी बेटी को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान करने को तैयार हैं, लेकिन आर्थिक अभाव उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और दानदाताओं से आगे आकर आर्थिक सहयोग करने की अपील की है, ताकि समय रहते लक्ष्मी का किडनी प्रत्यारोपण हो सके और वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
