
शौच के लिए उपयोग होने वाली भूमि पर घेराबंदी का महिलाओं ने किया विरोध, देखते ही देखते विवाद ने लिया उग्र रूप
जामुड़िया। जामुड़िया थाना क्षेत्र के बालानपुर गांव में शनिवार को जमीन को लेकर उपजे विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। एक निजी कंपनी द्वारा खरीदी गई भूमि की घेराबंदी का विरोध करने के दौरान दो पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। इस घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए, जिनमें दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद आसनसोल जिला अस्पताल रेफर किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालानपुर गांव स्थित एक भूमि का हिस्सा स्थानीय सिंह परिवार के सदस्यों द्वारा सुपर स्मेल्टर्स नामक एक निजी कंपनी को बेचा गया था। शनिवार को कंपनी की ओर से उक्त भूमि की चारदीवारी (घेराबंदी) का कार्य शुरू कराया गया। इसी दौरान समीपवर्ती बाउरी पाड़ा की महिलाओं ने मौके पर पहुंचकर कार्य रुकवा दिया। महिलाओं का कहना था कि जिस जमीन की घेराबंदी की जा रही है, उसका उपयोग बाउरी पाड़ा के लोग वर्षों से खुले में शौच के लिए करते आ रहे हैं। अचानक उस भूमि को बंद कर दिए जाने से बस्ती के लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना घेराबंदी नहीं करने की मांग की। बताया जाता है कि महिलाओं के विरोध के बाद सिंह पाड़ा और बाउरी पाड़ा के लोगों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद ने उग्र रूप धारण कर लिया और दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों एवं अन्य वस्तुओं से मारपीट शुरू हो गई। घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मारपीट में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए। इनमें दो लोगों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य को भी चोटें लगी हैं। सूचना मिलते ही जामुड़िया थाना पुलिस बड़ी संख्या में मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने घायलों को तत्काल अखलपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल दो लोगों को बेहतर इलाज के लिए आसनसोल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद बालानपुर गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है तथा दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में पुलिस भूमि विवाद और घेराबंदी के विरोध को घटना का मुख्य कारण मानकर सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। समाचार लिखे जाने तक किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हो सकी थी। वहीं प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है।
