
रानीगंज। समाज में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपनी पहचान केवल अपने पेशे या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि अपने नेक कार्यों और मानवीय सोच से बनाते हैं। रानीगंज के जेएम लाइन, सोस्तीगोरिया निवासी मुख्तार आलम ऐसे ही एक युवा हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही अपने मेहनत, संघर्ष और समाजसेवा के जज्बे से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है। मुख्तार आलम का मानना है कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद या धन से नहीं, बल्कि उसके द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों से बनती है। बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा रखने वाले मुख्तार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रानीगंज में ही पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने मार्शल आर्ट, कुंग-फू और कराटे का भी प्रशिक्षण लिया, जिससे उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और संघर्ष करने की भावना विकसित हुई। मुख्तार आलम प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बड़े प्रशंसक हैं। उनका रहन-सहन, बातचीत का अंदाज और व्यक्तित्व काफी हद तक शाहरुख खान से मिलता-जुलता है। हालांकि उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य केवल किसी अभिनेता की तरह लोकप्रिय बनना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना बनाया है। वर्तमान में मुख्तार आलम एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में जिम्मेदार पद पर कार्यरत हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वह नियमित रूप से समाज के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए समय निकालते हैं। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बच्चों की मदद करना उनकी प्राथमिकता है। वह अपनी आय का एक हिस्सा जरूरतमंदों के भोजन, शिक्षा और अन्य आवश्यक जरूरतों पर खर्च करते हैं। इसके साथ ही बच्चों के बीच समय बिताकर उनका उत्साहवर्धन करते हैं और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित भी करते हैं। मुख्तार आलम का कहना है कि यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी आय का थोड़ा-सा हिस्सा और अपने समय का कुछ अंश जरूरतमंदों के लिए समर्पित कर दे, तो समाज में कोई भी व्यक्ति खुद को असहाय महसूस नहीं करेगा। उनके अनुसार कई लोगों का जीवन ईश्वर की कृपा के साथ-साथ समाज की संवेदनशीलता और सहयोग पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की प्रसिद्धि या सम्मान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि लोगों में सेवा और सहयोग की भावना को जागृत करना है। वे चाहते हैं कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति यह समझे कि छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। किसी जरूरतमंद बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी परिवार की कठिनाई को कम करना या किसी निराश व्यक्ति को नई उम्मीद देना ही सबसे बड़ी मानव सेवा है। मुख्तार आलम का मानना है कि समाज में परिवर्तन किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की छोटी-छोटी सकारात्मक पहल से आता है। आज उनके सामाजिक कार्यों की चर्चा रानीगंज ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है। स्थानीय लोग उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत मान रहे हैं। मुख्तार आलम का जीवन इस बात का संदेश देता है कि यदि इंसान सच्ची नीयत, मेहनत और सेवा की भावना के साथ आगे बढ़े, तो वह न केवल अपनी अलग पहचान बना सकता है, बल्कि अनेक लोगों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी भी ला सकता है।
