
कोलकाता में अहम बैठक के बाद बढ़ीं अटकलें, संगठन में बड़े बदलाव की चर्चा तेज
कोलकाता/आसनसोल। पश्चिम बर्दवान की राजनीति में शुक्रवार देर शाम को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। पांडवेश्वर के पूर्व विधायक एवं तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बर्दवान जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य को भेज दिया है। उनके इस फैसले के बाद जिले की राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं और विभिन्न राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार, नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य संबंधी कारणों का उल्लेख किया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के समय और परिस्थितियों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में इसके पीछे अन्य वजहों को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संगठन में व्यापक बदलाव करते हुए राज्यभर की जिला और अन्य संगठनात्मक समितियों को भंग कर दिया था। इसके बाद 13 जून को नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती को दोबारा पश्चिम बर्दवान का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन उनकी पुनर्नियुक्ति के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर भी सामने आए थे। कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे से पहले नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने कोलकाता में विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतुव्रत बनर्जी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बताया जाता है कि करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में कांदी के पूर्व विधायक अपूर्व सरकार तथा आसनसोल नगर निगम के डिप्टी मेयर एवं कुल्टी विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी अभिजीत घटक भी मौजूद थे। बैठक समाप्त होने के कुछ समय बाद ही उनके इस्तीफे की खबर सामने आई, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ऋतुव्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में बदले राजनीतिक परिदृश्य और पांडवेश्वर क्षेत्र में उनके करीबी नेताओं पर बढ़ते दबाव के बीच यह फैसला लिया गया हो सकता है।
हालांकि, नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के किसी बागी गुट में शामिल होने की खबरों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने भी इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व की ओर से भी उनके इस्तीफे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पश्चिम बर्दवान की राजनीति में इस घटनाक्रम को एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम और जिले में संभावित संगठनात्मक फेरबदल पर टिकी हुई हैं।
