
“यशोदा-देवकी : एक माँ, दो तपस्या” सांस्कृतिक कार्यक्रम ने जीता सभी का दिल
रानीगंज। मातृत्व, ममता और संस्कारों को समर्पित एक भावनात्मक एवं भव्य आयोजन रविवार को रानीगंज में देखने को मिला, जब रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स (आरसीसी) की लेडीज विंग द्वारा मातृ दिवस के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “यशोदा-देवकी : एक माँ, दो तपस्या” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और मातृत्व की महिमा को एक नई ऊंचाई प्रदान की। रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स भवन में आयोजित इस विशेष समारोह का मुख्य उद्देश्य 65 वर्ष से अधिक आयु की माताओं को सम्मानित करना और समाज में उनके योगदान को सराहना था। कार्यक्रम की थीम “Honouring the Essence of Motherhood” रखी गई थी, जिसके अंतर्गत चैंबर के सदस्यों की पूजनीय माताओं के लिए एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वरिष्ठ माताओं को पुष्प, सम्मान-पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। पूरे सभागार में भावनात्मक और पारिवारिक वातावरण देखने को मिला। माताओं के सम्मान में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और कई लोग भावुक भी हो उठे। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मिशन हॉस्पिटल, दुर्गापुर के चेयरमैन डॉ. सत्यजीत बोस अपनी धर्मपत्नी के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि माँ केवल परिवार की आधारशिला नहीं होती, बल्कि समाज और संस्कारों की सबसे बड़ी शक्ति होती है। उन्होंने माताओं के आशीर्वाद और त्याग को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। “यशोदा-देवकी : एक माँ, दो तपस्या” शीर्षक पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। कलाकारों ने मां के त्याग, प्रेम, समर्पण और वात्सल्य को बेहद भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस सफल आयोजन को संपन्न कराने में आरसीसी लेडीज विंग की चेयरपर्सन वाणी खेतान, सलाहकार अरुण भरतिया, आरसीसी अध्यक्ष जुगल किशोर गुप्ता तथा मानद महासचिव सरत कनोडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति के सदस्यों ने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और भव्य बनाने में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि — “हर सफलता के पीछे माँ का आशीर्वाद होता है।” इस आयोजन ने न केवल माताओं को सम्मान देने का कार्य किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा भी दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान मातृत्व के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की सुंदर झलक देखने को मिली, जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन में माँ के प्रति सम्मान और श्रद्धा को और अधिक मजबूत कर दिया।
