तृणमूल कार्यालय में आगजनी के बाद भाजपा ने उठाया पुनर्निर्माण का जिम्मा

आसनसोल में बदली राजनीतिक तस्वीर, मरम्मत कार्य में जुटे भाजपा कार्यकर्ता

आसनसोल। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक तनाव के बीच आसनसोल से एक अलग तस्वीर सामने आई है। कोर्ट मोड़ इलाके में तृणमूल कांग्रेस की पार्षद मौसमी बोस के कार्यालय में आगजनी की घटना के बाद जहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे, वहीं अब उसी कार्यालय के पुनर्निर्माण और मरम्मत का कार्य भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए जाने से इलाके की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
बताया जा रहा है कि आग लगने की घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से भाजपा पर आरोप लगाए गए थे। घटना के तुरंत बाद आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी घटनास्थल पर पहुंचे थे। उस समय उन्होंने साफ कहा था कि यह तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक मामला प्रतीत होता है और भाजपा का नाम लेकर राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
घटना के दो दिन बाद जब स्थानीय लोगों ने जले हुए कार्यालय में मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू होते देखा, तो इलाके में चर्चा और तेज हो गई। खास बात यह रही कि कार्यालय को दोबारा व्यवस्थित करने का कार्य भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा था। टूटे हिस्सों की मरम्मत, दीवारों की सफाई और कार्यालय को फिर से उपयोग के योग्य बनाने का काम तेजी से शुरू किया गया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी हिंसा, प्रतिशोध और राजनीतिक दुश्मनी की राजनीति में विश्वास नहीं करती। उनका मानना है कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों का सम्मान और अस्तित्व जरूरी है तथा राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सामाजिक सौहार्द बनाए रखना आवश्यक है।
आसनसोल उत्तर विधानसभा मंडल के भाजपा नेता अंकुर राय ने कहा कि कुछ असामाजिक और अराजक तत्वों ने तृणमूल कार्यालय में आग लगाकर क्षेत्र का माहौल खराब करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि भाजपा शांति और भाईचारे की राजनीति करना चाहती है, इसलिए पार्टी कार्यकर्ता अपने खर्च पर पार्षद कार्यालय को दोबारा तैयार कराने में जुटे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद आसनसोल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आगजनी को लेकर राजनीतिक आरोपों का दौर जारी है, तो दूसरी ओर भाजपा द्वारा तृणमूल कार्यालय के पुनर्निर्माण की पहल को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग इसे राजनीतिक सौहार्द की पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दल आपसी तनाव कम कर शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में कितना सकारात्मक कदम उठाते हैं।

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