
कोलकाता, 20 अप्रैल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की धांधली, फर्जी मतदान और बूथ कब्जे की आशंका को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग ने विशेष रूप से वोटर स्लिप वितरण, मतदाता पहचान सत्यापन और मतदाता सूची की दोबारा जांच को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता का पहला बड़ा परीक्षण 23 अप्रैल को होने वाले प्रथम चरण के मतदान में होगा।
आयोग के निर्देशानुसार बूथ स्तरीय अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं को वोटर स्लिप सौंपेंगे। यदि संबंधित मतदाता घर पर मौजूद नहीं मिलता है, तो परिवार के किसी वयस्क सदस्य की पहचान पत्र जांचने के बाद उसे स्लिप दी जाएगी।
वोटर स्लिप देने के बाद संबंधित रजिस्टर में हस्ताक्षर लेना अनिवार्य किया गया है। साथ ही किसी एक व्यक्ति को कई मतदाताओं की स्लिप एक साथ देने पर रोक लगा दी गई है।
यदि किसी घर में संबंधित मतदाता नहीं मिलता और स्लिप वितरित नहीं हो पाती है, तो इसकी पूरी जानकारी बूथ स्तरीय अधिकारी को दर्ज करनी होगी। मतदान के दिन यह सूचना पीठासीन अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई मतदाता वोटर स्लिप के बिना मतदान केंद्र पहुंचता है, तो उसके पहचान पत्र की विशेष रूप से जांच की जाएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि उसने वोटर स्लिप क्यों प्राप्त नहीं की।
मतदाता सूची में अनुपस्थित, लापता, मृत या दोहराए गए नामों की अंतिम समय में एक बार फिर समीक्षा की जाएगी। इसी कारण स्लिप वितरण के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी यह भी सत्यापित करेंगे कि सूची में दर्ज व्यक्ति वास्तव में मौजूद है या नहीं।
यह जानकारी रिटर्निंग अधिकारी अथवा सहायक रिटर्निंग अधिकारी को भेजी जाएगी और मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी के पास भी उपलब्ध रहेगी।
चुनाव आयोग का मानना है कि इन उपायों से किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर मतदान करने या फर्जी वोट डालने की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
