
जयपुर की मधु भट के लोक गीतों से भाव विभोर हुए श्रोता
वरिष्ठ साहित्यकार नथमल केडिया का अभिनंदन
कोलकाता। राजस्थान दिवस के पावन मौके पर अंतर्राष्ट्रीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं समर्पण ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “संस्कृति संनाद” सांस्कृतिक संध्या अत्यंत भव्य एवं अविस्मरणीय रूप में संपन्न हुईl विधान गार्डन, कोलकाता में यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध परंपराओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बन गया—मानो पूरा राजस्थान ही कोलकाता की धरती पर साकार हो उठा हो।
राजस्थान दिवस, गणगौर पूजा, हिन्दू नववर्ष एवं राम नवमी जैसे पावन अवसरों की गरिमा से ओतप्रोत इस संध्या में संस्कृति, संगीत और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री श्यामलाल अग्रवाल के करकमलों से हुआ, वहीं ख्यातिलब्ध उद्योगपति श्री आदित्य पोद्दार की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की प्रतिष्ठा को और ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही जयपुर से पधारीं प्रसिद्ध राजस्थानी लोक कलाकार मधु भट्ट, जिन्होंने अपने सुरों और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों से समूचे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गीतों की मधुरता और नृत्य की लयात्मकता ने दर्शकों को राजस्थान की मिट्टी की सौंधी खुशबू का अनुभव कराया। केसरिया बालम…, धरती धोरा री…, घूमर समेत हर प्रकार के लोकगीत और राष्ट्र भक्ति से सराबोर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों का उत्साह यह सिद्ध कर रहा था कि कला की कोई सीमा नहीं होती—वह सीधे हृदय को स्पर्श करती है।
इस सांस्कृतिक संध्या में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामयी बना दिया। सुसज्जित मंच, पारंपरिक सजावट, और राजस्थानी लोक रंगों से सजी संध्या ने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जड़ों से जुड़ने का भावपूर्ण अवसर प्रदान किया। इस मौके पर राजस्थानी भाषा साहित्य और संस्कृति के श्रीवृद्धि में योगदान देने वाले साहित्यकार स्व. नथमल केडिया को उनके साहित्यिक योगदान के लिए उनके पुत्र श्री शरद केडिया को अभिनंदन पत्र देकर विशेष तौर पर सम्मानित किया.
अंतर्राष्ट्रीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं समर्पण ट्रस्ट के सभापति श्री दिनेश बजाज ने कहा कि “संस्कृति संनाद हमारी परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।”
वहीं कार्यकारी अध्यक्ष श्री निरंजन अग्रवाल ने कहा, “हमारा उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक एकता और समरसता को बढ़ावा देना है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से हम अपनी लोक कलाओं को जीवंत बनाए रखने का सतत प्रयास कर रहे हैं।”
समर्पण ट्रस्ट के सलाहकार व पत्रकार डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि राजस्थानी संस्कृति की संरक्षण और युवाओं के बीच इसके प्रसार को ट्रस्ट प्रतिबद्ध है।
समर्पण ट्रस्ट के ट्रस्टी प्रदीप ढेडिया ने अपने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने सबके प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट संस्कृति संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है। आगामी दिनों में इस तरह के और कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। कार्यक्रम का कुशल संचालन महावीर प्रसाद रावत ने किया।
कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर छपते छपते हिंदी दैनिक था तो वही कार्यक्रम का प्रबंधन आनंद इवेंट्स द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम में नाईजर के काउंसल राजेंद्र खंडेलवाल, मालदीव के काउंसल रामकृष्ण जायसवाल, विश्वंभर नेवर, संतोष लाहोटी, चेतन होरा, विप्र फाउंडेशन के अध्यक्ष किशन गोस्वामी, पवन पाटोदिया, रश्मि बिहानी, देविका जैन, आदित्य सुराना, श्याम सुन्दर अग्रवाल, आचार्य राकेश पांडेय, रतनलाल अग्रवाल, भगवती प्रसाद सराफ, दीपू शर्मा, इंद्रनील चौधरी, प्रकाश पारख, रमेश बाजोड़िया, विजय दर्क, सुशील कोठारी, लोकगायक मधु भट, प्रदीप निर्मल व टीम को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में किरण तुलसियन, अक्षय बिन्जराजका, अमन ढेडिया, अनिल मलावत, अनिल निगमिया, अशोक ढेडिया, भागचंद मुंधड़ा, बिमल बेंगानी, हरि राम अग्रवाल, हर्ष पोद्दार, किशन डागा, के. एल. लालानी, ओ. पी. कनोडिया, प्रदीप मस्करा, रवि वर्मा, संतोष सराफ समेत अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अंतर्राष्ट्रीय मारवाड़ी सम्मेलन की मनीषा बजाज, पद्मश्री पोद्दार, राजित भुतोड़िया तथा सुशील तुलस्यान तथा समर्पण ट्रस्ट के अभिषेक डोकानिया, गणेश अग्रवाल, महेश भुवालका, पंकज भालोटिया, पवन बंसल, संजय जैन, संजय रुंगटा, सोमनाथ अडूकिया का विशेष योगदान रहा।
