जामुड़िया में आईएसएफ कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला, कुल्हाड़ी से वार कर किया गंभीर घायल; आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया सियासी माहौल

जामुड़िया। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक वातावरण लगातार उग्र होता जा रहा है। इसी क्रम में जामुड़िया थाना क्षेत्र के राखाकुरिया इलाके से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के एक कार्यकर्ता पर अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला कर दिया। हमले में कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके सिर में गहरी चोट आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब आईएसएफ की एक चुनावी बैठक समाप्त होने के बाद संबंधित कार्यकर्ता अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उसे घेर लिया और उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में उसका सिर फट गया और वह गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की सहायता से घायल कार्यकर्ता को जामुड़िया थाने लाया गया, जहां से पुलिस वाहन द्वारा उसे आसनसोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।चिकित्सकों के अनुसार, घायल की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन सिर में गंभीर चोट होने के कारण उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। आईएसएफ नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों का हाथ है। वहीं, पीड़ित के भाई आफतार अली ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। वही दूसरी ओर, जामुड़िया से माकपा प्रत्याशी शब्बीर हुसैन ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की संभावित जीत से घबराकर इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दे रही है। उन्होंने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके घरों की तलाशी की मांग करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान अशांति फैलाने के लिए अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस प्रकार की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के राज्य नेता वी. सिब दासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी का इस घटना से कोई संबंध नहीं है और तृणमूल कांग्रेस हिंसा की राजनीति में विश्वास नहीं रखती। चुनाव से पहले इस प्रकार की घटनाएं प्रशासन और आम जनता के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। जामुड़िया की यह घटना एक बार फिर बंगाल की चुनावी हिंसा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक न्याय के कटघरे में लाया जाता है।

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