
रानीगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंचती जा रही हैं। इसी बीच भाजपा ने रानीगंज विधानसभा सीट से एक अप्रत्याशित और चर्चित नाम सामने लाकर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। जिसने सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी ने पेशे से अधिवक्ता और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय पार्थ घोष को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस घोषणा के बाद से ही रानीगंज के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अंडाल के धूपचूरिया निवासी पार्थ घोष कानून और राजनीति दोनों क्षेत्रों में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने बीते वर्ष भाजपा के लीगल सेल (विधि प्रकोष्ठ) के राज्य संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। लंबे समय से अधिवक्ता के रूप में कार्यरत घोष को संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, सक्रियता और अनुभव को देखते हुए पार्टी ने इस बार चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। पार्थ घोष की उम्मीदवारी को रानीगंज में एक नए राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक शिक्षित और कानूनी समझ रखने वाले उम्मीदवार के रूप में घोष स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में सक्षम हो सकते हैं। रानीगंज सीट पर उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और माकपा के अनुभवी नेताओं कालोबरण मंडल और नारायण बाउरी से होगा। दोनों ही नेता अपने-अपने दलों में मजबूत पकड़ रखते हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प होने की संभावना है। भाजपा कार्यकर्ताओं में पार्थ घोष की उम्मीदवारी को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि एक पढ़े-लिखे और संगठन से जुड़े चेहरे के रूप में उन्हें समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि रानीगंज की जनता इस ‘कानूनी योद्धा’ पर कितना भरोसा जताती है और क्या पार्थ घोष भाजपा के लिए इस सीट पर जीत दर्ज कर कमल खिलाने में सफल हो पाते हैं।
