
कोलकाता, 13 फरवरी । बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों पर भारत की नजर टिकी हुई थी। मतगणना के अंतिम चरण में यह लगभग साफ हो गया है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। 299 सदस्यीय संसद में बहुमत का आंकड़ा पार करते ही सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने उम्मीद जताई है कि अब पड़ोसी देश में शांति बहाल होने के साथ ही भारत के साथ संबंध बेहतर होगा।
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ था। ऐसे में यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा था। जनता के सामने मुख्य सवाल था कि देश की बागडोर बीएनपी संभालेगी या जमात। शुक्रवार सुबह तक आए रुझानों ने तस्वीर स्पष्ट कर दी कि दिवंगत खालिदा जिया की पार्टी सरकार गठन की स्थिति में है।
नतीजे सामने आते ही भाजपा नेता दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि बीएनपी के नेतृत्व में बांग्लादेश में शांति और स्थिरता लौटेगी तथा भारत-बांग्लादेश संबंध और मजबूत होंगे। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा लगातार मुखर रही थी। उस दौरान दिलीप घोष ने बांग्लादेशी उत्पादों के बहिष्कार की अपील भी की थी, जबकि राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी कई घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
शुक्रवार को दिलीप घोष ने कहा कि अच्छी बात है बांग्लादेश के लोगों ने अपने लिए नई सरकार चुन ली है। सरकार में चाहे जो भी हो, हमारा पड़ोसी देश है और स्थाई सरकार होने से देश में शांति की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी संबंध बेहतर होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी होती है देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा करना और नई सरकार गठन हो रही है तो वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होगी।
चुनाव आयोग के अनुसार इस बार कुल 60.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पोस्टल बैलेट में 80.11 प्रतिशत वोट पड़े, जिनमें से 70.25 प्रतिशत वैध पाए गए। जनमत संग्रह में 77.7 प्रतिशत मत ‘बीएनपी’ के पक्ष में रहे।
उल्लेखनीय है कि, व्यापक उत्साह के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था और किसी बड़े हिंसक संघर्ष की खबर नहीं आई।
राजधानी ढाका में जमात ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है, हालांकि सरकार गठन की दौड़ में बीएनपी आगे है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नए नेतृत्व के सामने आंतरिक स्थिरता कायम रखने और पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ संबंधों को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
