
कोलकाता, 13 फरवरी । हिंदी विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग, प्लेसमेंट एंड स्टूडेंट वेलफेयर सेल की ओर से “अमूर्त क्षमता को आकार देना : कैरियर और जीवन के लिए व्यवहार कौशल” विषय पर एकदिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की प्रोफेसर डॉ. अनुप्रिया पांडे ने व्यवहार कौशल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सॉफ्ट स्किल और प्रभावी संचार क्षमता भी उतनी ही आवश्यक है। तकनीकी योग्यता साक्षात्कार तक पहुंचा सकती है, लेकिन नौकरी प्राप्त करने और कार्यस्थल पर सफल होने के लिए व्यवहार कौशल निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

डॉ. अनुप्रिया पांडे ने जोसेफ लुफ्ट और हैरिंगटन इंगम द्वारा विकसित ‘जोहरी विंडो मॉडल’ का उल्लेख करते हुए आत्म-जागरूकता, व्यक्तित्व विकास और पेशेवर सफलता के बीच संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने सहानुभूति, टीमवर्क और संप्रेषण क्षमता को मानव संसाधन विकास के प्रमुख आधार बताए।

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने कहा कि पारंपरिक शैक्षणिक संस्थान अक्सर कठोर अनुशासन और पुराने अनुभवों पर अधिक निर्भर रहते हैं, जिससे नवाचार और आधुनिक दृष्टिकोण के विकास में बाधा आती है। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु ऑफलाइन कौशल वर्धन कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी।

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. जेके भारती, डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी, डॉ. केएन भारती सहित काजरी दास, मधुबंती गांगुली, अमन, राज और अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे। अन्य विद्यालय के शिक्षक विनोद यादव ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन ट्रेनिंग, प्लेसमेंट एंड स्टूडेंट वेलफेयर सेल के संयोजक डॉ. इंद्रजीत यादव ने किया।
