
आसनसोल। नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (NFITU) ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित हड़ताल से स्वयं को अलग रखने की घोषणा की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हड़ताल का समर्थन नहीं करेगा और श्रमिक हितों की रक्षा संवाद, परामर्श और सहभागी निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से ही की जानी चाहिए NFITU के प्रतिनिधि बुब्बा मुखर्जी ने बयान जारी कर कहा कि संगठन श्रमिकों के वास्तविक हित, औद्योगिक शांति, सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हड़ताल जैसे टकरावपूर्ण कदमों से उत्पादन, उद्योग और अंततः श्रमिकों के परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक वार्ता और रचनात्मक पहल ही बेहतर रास्ता है।
“संवाद से ही होगा समाधान”
बुब्बा मुखर्जी ने कहा कि वर्तमान समय में उद्योगों के समक्ष कई चुनौतियां हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रेरित हड़ताल से स्थिति और जटिल हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों की मांगों और समस्याओं को लेकर प्रबंधन और सरकार के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान दे सकता है। आगे उन्होंने कहा, “NFITU का मानना है कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत, विश्वास और सहभागिता से संभव है। हम श्रमिकों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन साथ ही औद्योगिक शांति और राष्ट्रीय विकास को भी समान महत्व देते हैं।”
र्श्रमिक हित सर्वोपरि
संगठन ने अपने मूल मंत्र सम्मानजनक कार्य, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। NFITU का कहना है कि वह श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और न्यायसंगत अवसर दिलाने के लिए प्रयासरत रहेगा, लेकिन किसी भी ऐसे आंदोलन से दूरी बनाए रखेगा जो उद्योग और देश के हितों को प्रभावित कर सकता है। NFITU और इसके सहयोगी संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे श्रमिकों के कल्याण के लिए वैकल्पिक मंचों और प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे। संगठन ने सभी श्रमिकों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें और उत्पादन तथा कार्य व्यवस्था को सामान्य रूप से जारी रखें। इस घोषणा के बाद श्रमिक संगठनों के बीच 12 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। NFITU का यह रुख औद्योगिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और श्रमिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
