वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की विकास दर बनी रहेगी सबसे तेज, 2026-27 में 6.8 से 7.5% रहने का अनुमान

वैश्विक स्तर पर जारी व्यापार युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर दुनिया में सबसे तेज बनी रहने की संभावना है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि घरेलू आर्थिक मजबूती और कम महंगाई दर के चलते आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.8 से 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था से भारत को विशेष मदद मिलने की संभावना सीमित है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि यदि मौजूदा कैलेंडर वर्ष में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं होता, तो भारतीय विकास दर पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका की ओर से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बावजूद सेवा क्षेत्र के निर्यात में बनी तेजी के कारण आर्थिक विकास दर 7.4 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर के दौरान वस्तु और सेवा क्षेत्र को मिलाकर निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, अमेरिका को होने वाले निर्यात की वृद्धि दर में आ रही कमी को देखते हुए, व्यापार समझौता नहीं होने की स्थिति में विकास दर पर दबाव पड़ सकता है।
महंगाई दर को लेकर सर्वेक्षण में कहा गया है कि यह फिलहाल 2.9 प्रतिशत पर बनी हुई है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम स्तर है

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