
कोलकाता, 26 जनवरी । पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी 11 सदस्यीय चुनाव घोषणा समिति की घोषणा कर दी है। पार्टी ने उत्तर कोलकाता के वरिष्ठ नेता और हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तापस राय को इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
भाजपा द्वारा जारी सूची के अनुसार, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और बालुरघाट के विधायक अशोक लाहिड़ी को समिति का संयोजक बनाया गया है, जबकि आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल को सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति के अन्य सदस्यों में सांसद मनोज तिग्गा, स्वपन दासगुप्ता, शिशिर बजोरिया, चित्तरंजन मंडल, अमलकांति राय, वैशाली डालमिया, अनिर्वाण गांगुली और अधिवक्ता देवजीत सरकार शामिल हैं।
तापस राय को समिति की कमान सौंपे जाने पर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा उसी नेता को आगे कर रही है, जिन्हें कुछ समय पहले तक वे ‘नौकरी घोटाले से जुड़े’ बताते थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान भाजपा नेताओं ने तापस राय पर नियुक्ति घोटाले से जुड़े आरोप लगाए थे। अब वही नेता भाजपा के लिए ‘सोनार बांग्ला’ का रोडमैप तैयार करेंगे।
तृणमूल के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेतृत्व ने तापस राय का बचाव किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तापस राय वर्तमान में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि तापस राय एक अनुभवी राजनेता हैं और उनके राजनीतिक अनुभव व वरिष्ठता को देखते हुए ही उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तापस राय को यह बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने न केवल उत्तर कोलकाता में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है, बल्कि अन्य दलों से आए अनुभवी नेताओं को भी यह संदेश दिया है कि पार्टी में उनकी राजनीतिक क्षमता और अनुभव को सम्मान दिया जाएगा।
