
कोलकाता, 22 जनवरी । कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को होने वाली सरस्वती पूजा के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस से सहायता लेने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतनी होगी।
यह निर्देश जादवपुर विश्वविद्यालय में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। इससे पहले राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए धन आवंटित किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी कैमरों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है और शीघ्र ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि सरस्वती पूजा के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न अप्रिय घटनाओं की आशंका रहती है। उन्होंने अदालत से पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि राज्य एजेंसी द्वारा सीसीटीवी कैमरों की स्थापना का कार्य चार सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि, अधिवक्ता सोहम दास ने जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रावास में रैगिंग से जुड़ी एक छात्रा की मौत के बाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। पिछले वर्ष सितंबर में जादवपुर विश्वविद्यालय की अंग्रेजी ऑनर्स की तृतीय वर्ष की छात्रा अनामिका मंडल की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
मृत छात्रा के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उनकी बेटी को परिसर के अंदर स्थित जलाशय में धक्का दिया गया। इस संबंध में जादवपुर थाने में हत्या की शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में विश्वविद्यालय परिसर के तालाब से छात्रा का शव बरामद हुआ था।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले ही राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को विश्वविद्यालय की सुरक्षा बढ़ाने के लिए धन आवंटित करने का निर्देश दिया था। इसके तहत परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और सुरक्षा गार्डों की भी तैनाती की गई है।
