
जामुड़िया। जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र की लाइफ लाइन कहे जाने वाली सिंघारन नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए शनिवार को सिंहारन नदी बचाओ कमेटी की तरफ से दो दिवसीय पदयात्रा निकाली गई है.आरोप है कि जामुडिया में औद्योगीकरण होने के बाद जहां कारखानों के पास स्थित गांव के लोगों को प्रदूषण की समस्या झेलनी पड़ रही है। वही पीने के शुद्ध पानी की भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं उद्योगों की वजह से जामुडिया की जीवनदायी कही जाने वाली सिघारन नदी अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच चुकी है। यहां कारखाना बनने के बाद नदी के पानी को फैक्ट्रियों द्वारा दूषित करना शुरू कर दिया गया। जिसके कारण अब यहां के ग्रामीण द्वारा इस नदी के पानी का उपयोग नहीं करते है। वर्तमान में इलाके के कारखानो द्वारा नदी की गति और अस्तित्व के साथ भी छेड़छाड़ कर दी गई है। जिसको लेकर सिंहारन नदी बचाओ कमेटी की तरफ से नदी के अस्तित्व को बचाने को लेकर दो दिवसीय पदयात्रा निकाली गई है. इस बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए संगठन संयोजक अजित कुमार कोड़ा ने बताया यह नदी बहुत ऐतिहासिक और प्राचीन नदी है इस नदी के साथ इस क्षेत्र का इतिहास जुड़ा हुआ है कहा जाता है कि भवानी पाठक और साधक बामा खेपा ने इस नदी के जल से सिंहारन मां काली प्रतिमा की पूजा अर्चना की थी और उन्होंने यहां पर इसी नदी के जल का उपयोग करके मां काली की आराधना की थी लेकिन आज उसे नदी को नष्ट किया जा रहा है उन्होंने कहा कि खासकर जमुरिया से लेकर बेल बाद तक नदी की हालत बहुत ज्यादा खराब है यहां पर कारखाना मालिकों द्वारा नदी पर अतिक्रमण कर लिया गया है जो नदी 200 फीट चौड़ी थी वह इस क्षेत्र में सिर्फ 20 फीट की नाली बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि इस नदी के दुर्दशा को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासन के हर स्तर पर गुहार लगाई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है आसनसोल में एक तालाब को भरा जाता है उसे पर मुख्यमंत्री बयान देती हैं लेकिन यहां पर एक ऐतिहासिक नदी को नष्ट किया जा रहा है उसे पर मुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आ रहा है इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह नदी जमुरिया में अखलपुर से शुरू होकर दुर्गापुर के वरीय तक गई है लेकिन कारखाना मालिकों द्वारा जिस तरह से नदी को नष्ट किया जा रहा है उसे नदी के तट पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि नदी के तट पर कई गांव है उन गांव के लोग पहले इस नदी के पानी का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब हालत ऐसी हो गई है कि इस नदी के पानी के इस्तेमाल से लोगों को बीमारियां हो रही है उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह एक बहुत ऐतिहासिक नदी है और इस तरह से नदी को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है।
