श्रीकृष्ण एवम् सुदामा की मित्रता समाज में परस्पर सद्भावना, समानता की प्रेरणा देती है

माथुर वैश्य भवन में श्रीमद्भागवत कथा ।

कोलकाता । माथुरवैश्य भवन में श्रीधाम, वृंदावन से पधारे श्रीभगवान भईयाजी ने श्रीमद्भागवत कथा में श्याम तेरी मुरली बजे धीरे – धीरे एवम् भक्ति भजनों की प्रस्तुति के साथ श्रीकृष्ण द्वारा गौमाता की सेवा का प्रसंग सुनाते हुए गौसंरक्षण, गौसंवर्धन की प्रेरणा दी । कथावाचक भईयाजी ने कहा श्रीकृष्ण का बचपन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा । मोरमुकुटधारी, पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण के जीवन में गौमाता उनकी आराध्य है । बांसुरी लिए हुए गाय चराने जाते थे एवं गौमाता, बछड़ों को मुरली की धुन सुनाते थे । कथावाचक भईयाजी ने श्रीकृष्ण – सुदामा मित्रता के प्रसंग में कहा श्रीकृष्ण एवम् सुदामा की मित्रता समाज में अमीर – गरीब वर्ग में परस्पर सद्भावना, समानता की प्रेरणा देती है ।
राधे – राधे, जय श्रीराधे… भक्तिमय वातावरण में प्रमुख यजमान मिथिलेश गुप्ता, आयोजक माथुरवैश्य इंटरनेशनल क्लब के अध्यक्ष अमित गुप्ता, सचिव प्रवीण गुप्ता, महेन्द्र गुप्ता, सुरेश कौशल, हरि प्रकाश, राजेन्द्र गुप्ता (कपूरवाले), चंद्र प्रकाश गुप्ता, नंदकिशोर चांडक, राजीव कौशल, नाथूराम गुप्ता, मंजू, आशा, संध्या, मीना, राजीव, गणेश शंकर, अरविंद, बीरेन्द्र गुप्ता, महिला समिति तथा कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन कर सामूहिक आरती की एवम् भाव – विभोर हो गये ।

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