अग्निमित्रा पॉल ने जैन समुदाय के अधिकारों की रक्षा की मांग की, ‘जियो और जीने दो’ नीति बनाए रखने की अपील

कोलकाता, 21 नवंबर । पश्चिम बंगाल राज्य सरकार की कुछ नीतियों को लेकर जैन समुदाय में चिंता बढ़ रही है। राज्य सरकार पर आरोप है कि अल्पसंख्यक विकास के नाम पर विशेष समुदाय पर ही ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो जैन धर्म की ‘जियो और जीने दो’ नीति के विपरीत है।
इस मामले में शुक्रवार पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी की नेत्री अग्निमित्रा पॉल ने जैन धर्म के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जैन धर्मावलंबी समुदाय दृढ़ता से मानता है – “अधर्म का विनाश हो और धर्म की विजय हो।”


अग्निमित्रा पॉल ने सरकार से अपील की कि तुरंत ऐसी कोई नीति या कदम वापस लिया जाए, जो जैन धर्म की मूल शिक्षाओं –अहिंसा और पारस्परिक सह-अस्तित्व के खिलाफ हो। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि जैन समुदाय भी एक अल्पसंख्यक है और अन्य अल्पसंख्यकों की तरह उन्हें भी समान सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए।


जैन समुदाय ने स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि राज्य सरकार उनके धार्मिक जीवन, स्वतंत्रता और स्वाभिमान का सम्मान करते हुए ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को कायम रखे।

 

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