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सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र कृतज्ञ भाव को जीवन में अपनाये - Kolkata Saransh News

सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र कृतज्ञ भाव को जीवन में अपनाये

कोलकाता : अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा ‘सफलता का महत्वपूर्ण सूत्र-कृतज्ञता’ विषय पर संगोष्ठी सम्मेलन सभागार में आयोजित की गई। अतिथि वक्ता संदीप मस्करा ने विषय पर बोलते हुए कहा कि साधारण तौर पर हम लोग सफलता को धन या सामाजिक पहचान या हमारे पास जो वस्तुएं हैं या हमारे पद या प्रतिष्ठा के मापदंड से हम लोग मापते हैं। इस सूत्र में अक्सर यह देखा जाता है कि हम आगे बढ़ने के लिए अपने मानसिक स्वास्थ्य एवं हमारे भावनात्मक आवश्यताओ को पीछे छोड़ देते हैं। अक्सर ऐसा प्रतीत होने लगता है कि जैसे हम किसी दौड़ में शामिल हैं। उन्होंने बताया प्रकृति में जो भी कुछ घट रहा है उसके पीछे एक पूरी व्यवस्था निहित है। आज सफलता का महत्वपूर्ण सूत्र है कृतज्ञता। अगर हम अपने जीवन में दूसरों की प्रशंसा करना,उन्हें धन्यवाद देना,उनके प्रति आभार प्रकट करना अगर सीख जाए एवं इन आदतों को जीवन में उतार ले तो हमारा जीवन का स्तर है, हमारे जीवन की सोच है काफी उन्नत हो जाएगी और उसके कारण हम एक सशक्त नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकेंगे। फैसला लेने की क्षमता हमारी बढ़ जाएगी,हमारी उत्पादकता बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि अक्सर वही होता है जो प्रकृति द्वारा पहले से निश्चित है। हमें अपने जीवन में अपने इर्द गिर्द देखना है कि हमारे जीवन मे कितने लोगों से हमें सहयोग एवं सहायता मिलती है। उसके कारण हम अपने जीवन में आगे बढ़ पाते हैं। अगर उनके प्रति हम अगर धन्यवाद की भावना रखेंगे तो हमारे में विनम्रता एवं प्रचुरता का बोध होता है। शिकायत करने की जगह दूसरों के गुणो पर ध्यान देने लगेंगे। इससे हमारा जीवन का मान बढ जायगा। कृतज्ञ भाव को हम अपने जीवन में कैसे अपनाए, इस विषय पर उन्होंने श्रोताओं के समक्ष कई व्यावहारिक सुझाव पर विस्तार से चर्चा की, जिसे श्रोताओं ने काफी सराहा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार लोहिया ने सभी आगंतुक सदस्यों का एवं अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के दिन अक्सर यह सुना जाता है कि मैं स्वयं सिद्ध व्यक्ति हूं। मनुष्य को जन्म लेने के बाद कम से कम 20 वर्ष तक समाज का सहयोग लेना पड़ता है। उसके बाद भी निरंतर अपने जीवन में, अपने व्यवसाय में या जिस किसी भी अध्यवसाय में रहे हमें लोगों से मदद सहयोग मिलती रहती है। अतः हमें सर्वदा यह स्मरण रखना चाहिए की परोक्ष एवं अपरोक्ष रूप से हमें हमारे जीवन में अनेक लोगों से सहयोग मिलता रहता है। हमें उनके प्रति कृतज्ञता भाव व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु के इन वचनों का स्मरण करवाया जिसमें उन्होंने कहा था कि मनुष्य को तृण जैसे विनम्र होना चाहिए, वृक्ष के जैसे सहिष्णु होना चाहिए एवं मान लेने की आशा नहीं रखते हुए दूसरों को मान देते रहना चाहिए। यह तभी संभव हो सकता है जब हम अपने सोच को कृतज्ञ भाव से भरें एवं प्रभु की , परिवार की एवं समाज की जो हमें कृपा मिलती है उसका हम अनुभव करें।

कार्यक्रम के प्रथम में अर्थ उप समिति के अध्यक्ष आत्माराम संथालिया ने अतिथि वक्ता का दुपट्टा उढा कर स्वागत किया एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार लोहिया ने एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री कैलाशपति तोदी ने किया।वक्तव्य के बाद में प्रश्नोत्तर का कार्यक्रम हुआ जिसमें अतिथि वक्ता ने श्रोताओ के प्रश्नों का उत्तर दिया।


कार्यक्रम मे राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री पवन जालान, जुगल किशोर जाजोदिया, अमित कुमार कहली, पियूष क्याल, नंदलाल सिंघानिया, शशी कान्त शाह, रितुश्री अग्रवाल, नथमल भीमराजका, अशोक संचेती जैन, अमर नाथ चौधरी, राम अवतार धूत, सज्जन बेरीवाल, ब्रिज मोहन धूत, सीताराम अग्रवाल, राजेश कुमार सोंथालिया,, साँवरमल शर्मा, रघुनाथ झुनझुनवाला, सज्जन खंडेलवाल, शरद श्रॉफ, योगिता अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल एवं अन्य गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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