
कोलकाता । भागवताचार्य स्वामी त्रिभुवन पुरी महाराज ने महादेव मंदिर, काशीपुर में श्रीमद्भागवत कथा में श्रोताओं को भाव विभोर करते हुए कहा भागवत कथा भक्त और भगवान की कथा है। भक्ति मार्ग और उससे मिलने वाले पुण्य फल मनुष्य को धर्म, आस्था और आध्यात्मिका से जोड़ते हैं । उन्होंने राजा परीक्षित को दिए श्राप और फिर मुक्ति के लिए शुकदेव से मिलन की कथा सुना कर भाव विभोर किया । कथा में त्रिभुवनपुरी महाराज ने कहा सात दिन बाद मृत्यु होने का श्राप मिलने से राजा परीक्षित चिंतित हो गए थे। मिलन के दौरान शुकदेव महाराज ने कहा कि सात दिन में मोक्ष सिर्फ श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से मिल सकता है । राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया । उन्होंने कहा कौरवों एवं पांडवों में मुख्य विवाद सिंहासन के उत्तराधिकार के विषय में था । कौरव हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र और गांधारी के पुत्र थे । पांडव हस्तिनापुर के पूर्व नरेश पाण्डु के पुत्र थे। धृतराष्ट्र के बड़े भाई पाण्डु थे । श्रीकृष्ण ने धर्म का साथ दिया एवम पाण्डव की जीत हुई । उन्होंने जीवन में सुख, शान्ति के लिये धर्म मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा दी । समाजसेवी दारोगा सिंह रघुवंशी, गिरजा सिंह, अजय सिंह, गायत्री सिंह, संजय सिंह, इन्दु सिंह, संदीप सिंह, मीरा सिंह, सिमी सिंह, अर्जुन सिंह एवम परिवार के सदस्यों ने भक्ति भाव से व्यास पीठ का पूजन किया ।

