न तेरा और न मेरा है जहां में सब छलावा है

शावर भकत ’भवानी’ कोलकाता

       “गजल”

न तेरा और न मेरा है
जहां में सब छलावा है ।

किसी का कोई कितना है
समय ही ये बताता है ।

सदा वो कटता है पहले
शजर जो सीधा होता है ।

फ़कत उसके इशारों पे
समय का चक्र चलता है ।

अलहदा वो है कहलाता
जो खुद के जैसा होता है ।

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