श्रीमद् भागवत शास्त्र की रचना कलयुग के जीवो के उद्धार करने के लिए की गई है — माधव जी महाराज

चिरकुंडा।चिरकुंडा-पंचेत रोड के तीन नं चढ़ाई स्थित श्रीश्री राम भरोसा धाम सार्वजनिक मंदिर के प्रतिष्ठा एवं स्थापना की प्रथम वर्षगांठ पर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कैलाश नगर श्रीधाम वृन्दावन से आए कथावाचक माधव जी महाराज ने कहा कि “”भागवत शास्त्र की रचना कलयुग के जीवो के उद्धार करने के लिए की गई है”” श्रीमद् भागवत में एक नवीन मार्गदर्शन कराया गया है। श्रीमद् भागवत शास्त्र ऐसा मार्गदर्शन कराता है कि योगी को जो आनंद समाधि में मिलता है वही आनंद आप घर में रहते हुए भी प्राप्त कर सकते हैं व घर में रहकर भी आप प्रभु को प्रसन्न कर सकते हैं प्राप्त कर सकते हैं परंतु आपका प्रत्येक व्यवहार भक्तिमय हो जाना चाहिए। गोपियों का प्रत्येक व्यवहार ही भक्तिमय बन गया था। घर में रहकर भी श्री भगवान का दर्शन हो सकता है। गोपियों को घर में ही परमात्मा का दर्शन हुआ। गोपियां यही मानती थी कि जहां हम जाते हैं हमारे कृष्ण हमारे साथ हैं। श्रीमद्भागवत मनुष्य को निर्भय बनाता है। श्रीमद्भागवत में लिखा है कि ध्रुवजी मृत्यु के सिर पर पांव रखकर स्वर्ग में गए थे।
राजा परीक्षित श्री भागवत समाप्ति पर बोले हैं कि मुझे अब काल का भय नहीं रहा,मुझे काल का वह नहीं लगता है।भागवत सुनकर परमात्मा के साथ प्रेम करने पर उसे काल का भय नहीं लगता।जो भागवत का आश्रय लेते हैं वह निर्भय बनते हैं। श्रीमद्भागवत की कथा अमर है।
अमर कथा का जो आश्रय लेता है वह अमर हो जाता है।
राजा परीक्षित और सुखदेव जी अमर हैं। श्रीमद् भागवत की कथा आपको अमर बनाती है और भक्ति रस का दान करती है।
मंदिर के प्रधान पुजारी राम रतन पाण्डेय के द्वारा वैदिक मंत्रों के द्वारा श्रीमद भागवत पुराण का विधिवत वैदिक परंपरा के अनुसार पूजन किए। आचार्य अविनाश पाण्डेय के द्वारा स्वस्तिवाचन,एकानंद पांडे के द्वारा पुरान वाचन,पुरुषोत्तम पांडे के द्वारा भगवत नाम का जप,मनोज पाण्डेय एवं सत्येंद्र पाण्डेय के द्वारा मंगलाचरण तथा शशि भूषण पाण्डेय के द्वारा मधुर भजन प्रस्तुत किया गया।

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